लखनऊ। परमात्मा की कृपा से संपत्ति नहीं, सत्संग मिलता है। मनुष्य के जीवन पर संगति का गहरा प्रभाव पड़ता है। सत्संग जीवन को परमात्मा की ओर ले जाता है, जबकि कुसंग पतन और अशांति का कारण बन सकता है। ये बातें स्वामी विष्णु दास जी महाराज ने रविवार को चौक स्थित प्राचीन श्री लेटे हुए हनुमान मंदिर में चल रही सप्तदिवसीय श्रीराम कथा के तीसरे दिन कहीं।
राम वनवास प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि मंथरा के कुसंग ने कैकेयी के विवेक को प्रभावित किया, जिससे अयोध्या का आनंद शोक में बदल गया। वनवास के निर्णय से अयोध्यावासी व्यथित हुए और राजा दशरथ भी गहरे दुख में डूब गए। उन्होंने जीवन में संगति का चयन सावधानी से करने की सीख दी। कथा में चित्रकूट में श्रीराम और भरत के मिलन का भावपूर्ण वर्णन किया गया। कथा संयोजक डॉ. पंकज सिंह भदौरिया ने बताया कि गोमती का जलस्तर बढ़ने के बावजूद श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है। कथा में विधायक मांडवेंद्र सिंह रानू, महेंद्र सिंह, संजीव अग्रवाल, ऊषा अग्रवाल, गरिमा टंडन, दीपक अग्रवाल समेत कई लोग मौजूद रहे।

पक्का पुल स्थित प्राचीन लेटे हनुमान मंदिर में श्रीराम कथा सुनाते स्वामी विष्णु दास महाराज और मौ

पक्का पुल स्थित प्राचीन लेटे हनुमान मंदिर में श्रीराम कथा सुनाते स्वामी विष्णु दास महाराज और मौ

पक्का पुल स्थित प्राचीन लेटे हनुमान मंदिर में श्रीराम कथा सुनाते स्वामी विष्णु दास महाराज और मौ
