आगरा के बाह के चौरंगाहार गांव में घर के दरवाजे पर 62 वर्षीय बाबूराम का शव रखा था, अंत्येष्टि को लेकर भाई आपस में भिड़ गए। बहनों की शादी एवं इलाज के खर्च को लेकर विवाद हुआ था। करीब 10 घंटे बाद रिश्तेदारों के हस्तक्षेप पर मृतक की अंत्येष्टि हो सकी।
बाह के चौरंगाहार गांव के बाबूराम की 7 संतानों में से नीतू, भूरी, सतीश, रंजीत उर्फ कल्लू की शादी हो गई है। मनीषा, अनीषा, जितेंद्र अविवाहित हैं। उनके बीमार होने पर जितेंद्र, रंजीत उर्फ कल्लू दिल्ली उपचार को ले गए थे। उन्होंने बताया कि दिल्ली में पिता के ट्यूमर का ऑपरेशन हुआ था।
सोमवार सुबह तड़के बाबूराम को घर लाते समय रास्ते में निधन हो गया। घर पर शव रखा तो इलाज एवं बहनों मनीषा, अनीषा की शादी के लिए खर्च को लेकर भाई सतीश से विवाद की स्थिति पैदा हो गई। खर्च के लेनदेन को लेकर अंत्येष्टि रोक दी गई। दोनों का आरोप था कि खर्च के बिना बहनों की शादी कैसे होगी?, इसलिए खर्च की मांग की गई थी।
वहीं सतीश की पत्नी सिया देवी का कहना है कि गहने गिरवी रख कर इलाज के लिए रुपये दिए थे। और रुपये की मांग को लेकर उनके साथ हाथापाई की गई थी। देख कर वह बेहोश हो गई थी। रिश्तेदारों ने अस्पताल में भर्ती कराया था। बाद में रिश्तेदारों ने हस्तक्षेप कर सुलह कराई। तब कहीं जाकर शाम 4 बजे अंतिम संस्कार हो सका। गांव भर में अंत्येष्टि को लेकर हुए विवाद की चर्चा हो रही है।
