An Exceptional Daughter: Vibha Did Not Give Up Despite Failures; Went on to Become a DEO

बेटी बेमिसाल, विभा यादव

झांसी। पिता खेतों में पसीना बहाकर परिवार की जरूरतें पूरी करते रहे और बेटी ने उन्हीं खेतों की मेड़ से निकलकर प्रशासनिक सेवा तक पहुंचने का सपना देखा। बीटेक के दौरान 28 लाख रुपये के पैकेज का अवसर मिला, लेकिन विभा यादव ने सरकारी सेवा का लक्ष्य नहीं छोड़ा। कई बार मिली विफलताओं के बावजूद उन्होंने तैयारी जारी रखी। करीब आठ साल के संघर्ष के बाद वर्ष 2026 में बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) की परीक्षा में सफल होकर जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) बनीं।


मोंठ तहसील के टांडा गांव की विभा वर्ष 2018 में पढ़ाई के लिए दिल्ली पहुंचीं। किसान परिवार से आने के कारण उनके सामने सीमित संसाधनों के बीच आगे बढ़ने की चुनौती थी। प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार असफलताओं के बीच दादा का भरोसा उनकी ताकत बना रहा। उनके हौसले और परिवार के सहयोग से विभा ने हार नहीं मानी और आखिरकार अपने लक्ष्य तक पहुंचीं। फिलहाल वह प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं।

इंटर में किया टॉप, बीटेक में मिला 28 लाख का पैकेज

विभा के पिता पिता गुलाब सिंह यादव ने बताया कि उनकी बेटी ने वर्ष 2013 में मोंठ के गौराबाई इंटर कॉलेज से इंटरमीडिएट की परीक्षा में विद्यालय में शीर्ष स्थान हासिल किया। इसके बाद कानपुर के छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय से कंप्यूटर साइंस में बीटेक किया। पढ़ाई के दौरान कैंपस प्लेसमेंट में उन्हें 28 लाख रुपये के पैकेज का अवसर मिला। ऐसे में यह नौकरी आर्थिक रूप से बेहतर विकल्प हो सकती थी। हालांकि, विभा ने इसे छोड़कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जारी रखने का फैसला किया।

दादा के भरोसे से मिली आगे बढ़ने की ताकत

विभा की सफलता सीमित संसाधनों के बीच बड़े सपने देखने वाले युवाओं के लिए प्रेरणा है। खेती पर निर्भर परिवार से निकलकर जिला शिक्षा अधिकारी बनने तक के सफर में उन्होंने असफलताओं को अपने लक्ष्य के आड़े नहीं आने दिया। उनके संघर्ष में दादा का विश्वास और परिवार का सहयोग अहम रहा। विभा की उपलब्धि ने मोंठ के टांडा गांव के साथ पूरे बुंदेलखंड को गौरवान्वित किया है।



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