मताधिकार, भारत के हर बालिग का नैसर्गिक अधिकार है। मतदाताओं के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बहाने इसी अधिकार के छीने जाने का आरोप लग रहा है। बिहार में जब SIR चल रहा था तो दिल्ली में प्रियंका वाड्रा ने एक टी-शर्ट पहनकर प्रदर्शन किया था कि मृत महिला को चुनाव आयोग ने जिंदा बता दिया है। तब ‘अमर उजाला’ ने उस महिला को जिंदा भी ढूंढ़ा और यह भी सामने लाया कि उसके वोटर में 1990 की जगह 1900 छप जाने के कारण गड़बड़ी हुई। अब ‘अमर उजाला’ फिर एक बड़ी खबर सामने ला रहा है, जब पूरे देश में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ SIR को लेकर ही विपक्षी दल प्रदर्शन कर रहे हैं। खबर यह है कि भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद नितिन नवीन के पिता दिवंगत विधायक नवीन किशोर सिन्हा के खिलाफ एक समय चुनाव लड़ने वाले शख्स का नाम वोटर लिस्ट से गायब है। यह शख्स निर्दलीय नहीं उतरा था, बल्कि कुमारी मायावती की बहुजन समाज पार्टी से प्रत्याशी था।
दावा- विशेष गहन पुनरीक्षण के पहले तक पटना में बांकीपुर का वोटर रहा
देश भर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर घमासान मचा हुआ है। बिहार में 2025 में जो एसआईआर की प्रक्रिया हुई, उसमें कई ऐसे लोगों के भी नाम कटने के आरोप लगे जो कि पिछले कई वर्षों से बिहार में अपने मताधिकार का प्रयोग करते आ रहे थे। ऐसे लोग लगभग हर चुनाव के पहले सामने आते हैं, जिनके जिंदा रहते ही उन्हें मृत मानकर वोटर लिस्ट से हटा दिया गया हो। लेकिन, SIR में यह विशेष तौर पर जांचने का एक बिंदु था तो बहुत सारे नाम हटे। मृत मानकर हटाए गए नामों में एक नाम ‘अमर उजाला’ सामने ला रहा है, जो नवीन किशोर सिन्हा के खिलाफ 1995 में पटना पश्चिम से बिहार विधानसभा का चुनाव का प्रत्याशी रहा हो। उनका नाम है राम जी प्रसाद राय। रामजी राय न केवल जीवित हैं, बल्कि अपने जिंदा होने का प्रमाण लेकर सरकारी दफ्तरों से लेकर राजनीतिक गलियारे तक घूम रहे हैं।
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प्रत्याशी के रूप में नाम- रामजी प्रसाद, वोटर कार्ड में रामजी प्रसाद राय
‘अमर उजाला’ से बातचीत में रामजी प्रसाद राय ने कहा कि वह लंबे समय से पटना में रह रहे हैं। 1995 में उन्होंने पटना पश्चिम विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के तत्कालीन प्रत्याशी नवीन किशोर सिन्हा के सामने चुनाव भी लड़ा था। ‘अमर उजाला’ ने भारत निर्वाचन आयोग के रिकॉर्ड से उस चुनाव में उतरे प्रत्याशियों की सूची निकाली तो बहुजन समाज पार्टी से रामजी प्रसाद नाम के प्रत्याशी को परिणाम में आठवें नंबर पर पाया। नवीन किशोर सिन्हा को तब 64619 वोट मिले थे और हारने वाले रामानंद यादव को 58035 वोट मिले थे। इसके बाद से वह जीवनपर्यंत विधायक रहे थे और जिस समय उनकी मौत हुई, तब उनका नाम उप मुख्यमंत्री के रूप में सबसे आगे चल रहा था। बाद में यही सीट बांकीपुर के नाम से जानी गई।
खैर, इस चुनाव में रामजी प्रसाद नाम के प्रत्याशी को हासिल वोटों की संख्या 866 थी। प्रत्याशी के रूप में जो रिकॉर्ड है, वहां नाम रामजी प्रसाद है। ऐसे में यह जांचना कि यही वह शख्स है- भारत निर्वाचन आयोग का काम है, क्योंकि इस शख्स के पास उपलब्ध अंतिम मतदाता पहचान पत्र में नाम रामजी प्रसाद राय लिखा है। वैसे, रामजी प्रसाद राय का कहना है कि नाम सुधार कर यह करवाया गया था। उनका कहना है कि जिस बूथ पर पहले उनका नाम दर्ज था, उसी बूथ पर उनकी पत्नी का नाम अभी मौजूद है, लेकिन उनका नाम गायब है। उन्होंने बताया कि 2005 में दानापुर से भी वह बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर चुनाव में उतरे थे। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले आननफानन में हुए SIR से पहले उनका नाम मतदाता सूची में दर्ज था और वह मताधिकार का हर बार उपयोग कर रहे थे।
बीएलओ से मिला, एसडीओ कार्यालय गया; समाधान नहीं हुआ
रामजी प्रसाद के अनुसार वह पटना के ही मूल निवासी हैं। राज्यसभा चुनाव जाने से पहले नितिन नवीन जिस बांकीपुर विधानसभा के विधायक थे, उसी क्षेत्र में मंदिरी काठपुल में घर है। आधार कार्ड, राशन कार्ड के साथ वह पुराना वोटर आईडी भी दिखाते हैं, जिसमें यह पता दर्ज है। उन्होंने दावा किया कि उनके परिवार के पुराने राशन कार्ड में भी उनका नाम दर्ज रहा है। वह जिससे भी मिल रहे हैं, एक ही सवाल पूछ रहे हैं कि मतदाता सूची में उनका नाम किस आधार पर हटाया गया? रामजी राय ने कहा कि नाम कटने के बाद उन्होंने बीएलओ से शिकायत की और एसडीओ कार्यालय तक गए, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि वह लगातार अधिकारियों से गुहार लगा रहे, लेकिन मतदाता सूची में अपना नाम वापस नहीं जुड़वा सके हैं। रामजी राय ने कहा कि वह ‘अमर उजाला’ के माध्यम से कहना चाहते हैं कि उनके नाम को मतदाता सूची से हटाए जाने की जांच हो और जिम्मेदारी तय की जाए। उन्होंने निर्वाचन प्रक्रिया में हुई कथित गलती को लेकर कड़ी कार्रवाई की मांग भी की।
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निर्वाचन आयोग ने मौका दिया, लेकिन फिर गलती किसकी है?
निर्वाचन आयोग ने बिहार में एसआईआर की प्रक्रिया 24 जून 2025 से शुरू की थी। आयोग के अनुसार इसका उद्देश्य मतदाता सूची में पात्र मतदाताओं को शामिल करना और मृत, स्थानांतरित या अपात्र मतदाताओं के नाम हटाना था। एक अगस्त 2025 को जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची के संबंध में आयोग ने ऐसे मतदाताओं की सूची भी उपलब्ध कराई थी, जिनके नाम 24 जून 2025 की सूची में थे, लेकिन ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं थे। ऐसे लोगों को दावा पेश करने का अवसर दिया गया था। आयोग ने 30 सितंबर 2025 को SIR की अंतिम सूची जारी होने की जानकारी देते हुए कहा था कि अंतिम मतदाता सूची में करीब 7.42 करोड़ मतदाता शामिल हैं। आयोग के अनुसार ड्राफ्ट सूची से करीब 65 लाख नाम हटे थे। आयोग ने यह भी कहा था कि पात्र व्यक्ति नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं और ERO के फैसले से असंतुष्ट होने पर अपील की व्यवस्था है। अब सवाल यह भी है कि अगर चुनाव आयोग ने यह व्यवस्था की तो क्या दो बार राष्ट्रीय दल का प्रत्याशी रह चुका शख्स जानबूझ कर अपना नाम शामिल करने के लिए आवेदन नहीं दे रहा होगा और यूं ही सालभर से भटक रहा होगा?
