मानसून आ चुका है। शहर की सड़कों पर जलभराव के दौरान मैनहोल नजर आएंगे और न ही खुदाई के बाद छोड़े गए गहरे गड्ढे, ऐसे में देखकर ही चलें। नगर निगम, मेट्रो और नेशनल हाईवे समेत कार्यदायी एजेंसियां और विभाग खुले पड़े गड्ढों और नालों के मैनहोल को अब तक ढक नहीं पाए हैं। लगातार हादसों के बाद भी शहर की सड़कों और फुटपाथ पर खुले छोड़े गए गहरे गड्ढे बारिश में जलभराव होने पर जानलेवा साबित हो सकते हैं।
एमजी रोड पर दीवानी चौराहे के सामने कांजी हाउस से सटे दो मैनहोल खुले पड़े हैं। भूमिगत नाले में प्लास्टिक कचरा भरा पड़ा है और यहां से हर दिन सैकड़ों लोग निकलते हैं। इसी तरह सिकंदरा के निर्माणाधीन मेट्रो स्टेशन के पास रेन वाटर हार्वेस्टिंग के लिए 6 से 8 फीट गहरा चैंबर बनाया गया है लेकिन एक महीने से इसके ऊपर कोई कवर नहीं रखा गया और ही इसके पास कोई बैरिकेडिंग की गई है। आईएसबीटी से खंदारी चौराहे के बीच ऐसे चैंबर की संख्या 10 से ज्यादा है जो ढके नहीं गए हैं। नेशनल हाईवे पर नाले के खुले पड़े चैंबर भी लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं।