वैवाहिक रिश्तों में मायके पक्ष का दखल और छोटी-छोटी बातें किस कदर तलाक की नौबत ले आती हैं, इसकी बानगी परिवार परामर्श केंद्र में देखने को मिल रही है। केंद्र में पहुंचे तीन अलग-अलग मामलों ने साबित कर दिया है कि समझदारी के अभाव और बाहरी हस्तक्षेप से घर बिखर रहे हैं। परिवार परामर्श केंद्र पर काउंसिलिंग के माध्यम से इनमें सुलह कराने का प्रयास किया जा रहा है।

केस 1: घूमने न ले जाने पर 15 दिन में छोड़ा ससुराल

पंचकुईया निवासी युवक का विवाह 2 दिसंबर 2025 को शाहगंज की युवती से हुआ था। शादी के महज 15 दिन बाद ही नवविवाहिता यह कहकर मायके चली गई कि पति उसे घुमाने नहीं ले जाता। पति का आरोप है कि पत्नी पूरी तरह अपनी मां के रिमोट कंट्रोल पर चलती है। घर में क्या पकेगा से लेकर कहां घूमना है, सब सास ही तय करती हैं।

केस 2: सास-बहू के झगड़े में फंसा रिश्ता

ताजगंज निवासी युवक की शादी 2 जुलाई 2021 को हुई थी। शादी के डेढ़ साल बाद बेटा होने के बाद से घर में कलह शुरू हो गई। पति का आरोप है कि बच्चे के जन्म के बाद पत्नी मायके के इशारों पर चल रही है। बिना बात के झगड़ा करती है। लड़की पक्ष का आरोप है कि सास, बेटी को नौकरानी बनाकर रखते हैं और सास खुद महारानी बनकर रहती हैं।

केस 3: मां के कहने पर बीमार बच्चे की अनदेखी

हाथरस की युवती का विवाह 1 जून 2025 को बमरौली कटारा के युवक से हुआ था। पति का आरोप है शादी के बाद से ही ससुराल में पत्नी का मायका पक्ष जरूरत से ज्यादा हस्तक्षेप कर रहा था। जब ससुराल वालों ने उनकी मनमानी पर रोक लगाई तो मां के बहकावे में बेटी ने अपने ही छोटे बच्चे की देखभाल करना बंद कर दिया। सही देखरेख न मिलने के कारण मासूम बीमार पड़ गया।



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