प्रदेश में तीन से छह साल के बच्चों को बालवाटिका (प्री-प्राइमरी स्कूलों) में प्रवेश दिलाकर कक्षा एक के लिए तैयार किया जा रहा है। इसके तहत बेसिक शिक्षा विभाग प्री-प्राइमरी के बच्चों का भी समग्र रिपोर्ट कार्ड जारी करेगा। इसमें उनकी पढ़ाई के साथ-साथ स्वास्थ्य व अन्य चीजों से जुड़ी जानकारी भी उपलब्ध होगी।
बेसिक शिक्षा विभाग ने पूर्व प्राथमिक शिक्षा के लिए शुक्रवार को फ्रेमवर्क जारी कर दिया है। इसमें अर्ली चाइल्डहुड केयर एंड एजुकेशन (ईसीसीई) कोर ग्रुप व्यवस्था सुधारकर बच्चों को तैयार किया जाएगा। जिलों के प्री-प्राइमरी स्कूलों में तीन से छह साल के बच्चों को गुणवत्तापरक शिक्षा के लिए छह सदस्यीय टीम काम करेगी। प्रवेश बढ़ाने व 70 प्रतिशत उपस्थिति पर जोर दिया जाएगा। छात्रों का समग्र रिपोर्ट कार्ड तैयार होगा और उन्हें निपुण बनाया जाएगा।
बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने सभी जिलों में छह सदस्यीय ईसीसीई कोर ग्रुप का गठन करने के निर्देश दिए हैं। इसमें जिला समन्वयक निपुण या प्रशिक्षण, एक नोडल स्टेट रिसोर्स ग्रुप सदस्य, डायट प्राचार्य से नामित नोडल प्रवक्ता, बीएसए का नामित एक अकादमिक रिसोर्स पर्सन, एक शिक्षक संकुल सदस्य और बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग का एक बाल विकास परियोजना अधिकारी इसमें शामिल होंगे।
उन्होंने कहा है कि ये परिषदीय स्कूलों के 200 मीटर के दायरे में स्थित आंगनबाड़ी केंद्रों जो गैर विभागीय भवन में चल रहे हैं उन्हें विद्यालय परिसर में स्थानांतरित कराएंगे। प्री-प्राइमरी स्कूलों में नामांकन बढ़ाने पर जोर देंगे, यह प्री-प्राइमरी स्कूलों में जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने में मदद करेंगे। यह लोगों को प्री-प्राइमरी शिक्षा का महत्व बताने को जागरूकता अभियान चलाएंगे, शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण व क्षमता संवर्द्धन कार्यशाला आयोजित कराएंगे।
यही नहीं बेसिक शिक्षा विभाग और बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग के बीच आपसी समन्वय स्थापित कर समय-समय पर आने वाली समस्याओं का समाधान कराएंगे। प्री-प्राइमरी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण खेल-आधारित एवं बाल केंद्रित शिक्षण वातावरण सुनिश्चित कराने का कार्य यह ईसीसीई कोर ग्रुप करेगा। प्री-प्राइमरी स्कूलों में निपुण भारत मिशन के तहत बच्चों को गणित व भाषा में दक्ष बनाने पर जोर दिया जा रहा है। स्कूलों में चार लर्निंग कॉर्नर भी स्थापित किए जा रहे हैं।
