आगरा के सदर बाजार स्थित पंकज स्कैनिंग एवं पैथोलॉजी रिसर्च सेंटर प्राइवेट लिमिटेड का सर्वर हैक कर साइबर अपराधियों ने चार साल का महत्वपूर्ण रिकॉर्ड चोरी कर उसे सर्वर से हटा दिया। मुख्य सर्वर का डाटा डिलीट करने के साथ फाइलों को एन्क्रिप्ट कर दिया। बैकअप के लिए लगी हार्ड डिस्क का डाटा भी मिटा दिया। एक मेल आईडी देकर उस पर संपर्क करने के लिए कहा गया है।

इस मामले में कंपनी के आईटी मैनेजर भरत लाल ने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई है। भरत लाल ने बताया कि 22 अक्तूबर की रात करीब 9:30 बजे कंपनी का सर्वर हैक किया गया। अगले दिन जांच करने पर पता चला कि पूरा डाटा डिलीट है। फाइलों को एन्क्रिप्ट कर एक फोल्डर में रखा गया है और उसी फोल्डर में संदेश छोड़ा गया है। संदेश में लिखा है बैकअप कंप्लीट, योर फाइल्स हैव बीन बैक्ड अप, इसके साथ ही संपर्क के लिए डेटालीक्स5@जीमेल डाॅट कॉम आईडी भी छोड़ी गई है।

उन्होंने आशंका जताई है कि साइबर अपराधियों ने कंपनी के डाटा की कॉपी भी अपने कब्जे में ले ली है। बैकअप हार्ड डिस्क में करीब चार वर्षों का रिकॉर्ड सुरक्षित था। डायग्नोस्टिक सेंटर में मरीजों की व्यक्तिगत जानकारी, पैथोलॉजी और रेडियोलॉजी जांच रिपोर्ट सहित संवेदनशील चिकित्सकीय रिकॉर्ड डिजिटल रूप में रखे जाते हैं। इन जानकारियों के दुरुपयोग किया जा सकता है। डाटा चोरी से मरीजों की रिपोर्टिंग और कंपनी के नियमित कामकाज पर असर पड़ा है। इससे कंपनी के व्यावसायिक हितों और प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंचा है।

डीसीपी साइबर क्राइम आदित्य सिंह ने बताया कि डायग्नोस्टिक सेंटर का सर्वर हैक करने और डाटा डिलीट करने की शिकायत पर साइबर क्राइम थाना पुलिस प्राथमिकी दर्ज कर जांच कर रही है। हैकर्स के आईपी एड्रेस और जानकारियां जुटाई जा रही हैं। इसके लिए पुलिस की टीमें काम कर रही हैं। – ,

बरतें ये सावधानी

– महत्वपूर्ण डाटा का नियमित बैकअप लें और उसकी अलग कॉपी ऑफलाइन रखें।

– बैकअप हार्ड डिस्क को हर समय सर्वर से कनेक्ट न रखें।

– सर्वर और कंप्यूटर में अपडेटेड सुरक्षा सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करें।

– ऑपरेटिंग सिस्टम और अन्य सॉफ्टवेयर को नियमित रूप से अपडेट करें।

– मजबूत पासवर्ड रखें और मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन अपनाएं।

– अनजान ईमेल, लिंक और अटैचमेंट खोलने से बचें।

– कर्मचारियों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करें।

– सर्वर पर संदिग्ध गतिविधि दिखे तो उसे नेटवर्क से अलग करें।

– हैकरों के संदेश, ईमेल और अन्य डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखें।

– घटना की सूचना तुरंत साइबर क्राइम पुलिस को दें और विशेषज्ञों की मदद लें।

 



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