पश्चिम बंगाल समेत तीन बड़े राज्यों में बहुजन समाज पार्टी की असफलता ने उसके अकेले चुनाव लड़ने की रणनीति को सवालों के घेरे में ला दिया है। पार्टी ने तीनों राज्यों में अकेले दम पर चुनाव लड़ा था, लेकिन उसका कोई भी प्रत्याशी जीत के मुहाने तक नहीं पहुंच सका। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में बसपा ने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन किया था, जिसके बाद उसके 10 सांसद बने थे। पार्टी की इस रणनीति से उसे लगातार नुकसान हो रहा है।
यूपी में वर्ष 2022 का विधानसभा चुनाव और वर्ष 2024 का लोकसभा चुनाव बसपा ने अकेले दम पर लड़ा, हालांकि विधानसभा चुनाव में केवल एक विधायक ही बन सका। इससे पहले वर्ष 2024 में हरियाणा विधानसभा चुनाव में बसपा ने इंडियन नेशनल लोकदल के साथ गठबंधन किया था, लेकिन वहां भी उसे असफलता मिली थी।
बसपा ने इससे पहले हरियाणा में तीन अलग-अलग दलों के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ा था। इसके बाद बसपा सुप्रीमो मायावती ने किसी भी दल के साथ गठबंधन कर चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा की थी, जिस पर वह अब तक कायम हैं। पांच राज्यों के हालिया चुनाव के नतीजों के बाद बदले राजनीतिक परिदृश्य में बसपा की इस रणनीति को लेकर उसके समर्थक भी असमंजस में हैं। पार्टी के कुछ नेताओं का मानना है कि अपना वजूद बचाने के लिए गठबंधन की राह चुननी चाहिए। बीते चुनावों में कांग्रेस और सपा ने बसपा को साथ लाने की कवायद भी की थी, लेकिन बात नहीं बन सकी।