कोहरे में दृश्यता 50 मीटर से भी कम होने पर उत्तर प्रदेश के एक्सप्रेसवे पर वाहनों की रफ्तार आधी से भी कम होगी। घने कोहरे और कम दृश्यता में दुर्घटनाओं को रोकने के लिए उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) ने सभी एक्सप्रेसवे पर गति सीमाएं घटाने और सुरक्षा इंतजाम मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। एक नवंबर से 15 फरवरी 2027 तक चरणबद्ध तरीके से संशोधित गति सीमाएं लागू की जाएंगी। वहीं, 50 मीटर से कम दृश्यता में चलने वाले वाहनों की पहचान कर उन्हें नजदीकी टोल प्लाजा, पेट्रोल पंप, रेस्तरां या अन्य सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जाएगा।जरूरत पड़ने पर वाहनों को काफिले में आगे रवाना किया जाएगा।

यूपीडा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी दीपक कुमार ने कहा कि शीतकाल में कोहरा और कम दृश्यता सड़क सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती हैं। सभी संबंधित अधिकारियों और एजेंसियों को समयबद्ध तरीके से निवारक उपाय लागू करने, गति सीमा का सख्ती से पालन कराने, आपातकालीन सहायता व्यवस्था मजबूत करने और सुरक्षा संबंधी बुनियादी सुविधाएं दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं।

यूपीडा के निर्देश आगरा-लखनऊ, पूर्वांचल, बुंदेलखंड, गोरखपुर लिंक और गंगा एक्सप्रेसवे पर लागू होंगे। हल्के मोटर वाहनों के लिए एक से 15 नवंबर तक दिन में अधिकतम गति सीमा 120 से घटाकर 100 और रात में 80 किमी प्रति घंटा रहेगी। 15 नवंबर के बाद इसे घटाकर दिन में 80 और रात में 60 किमी प्रति घंटा किया जाएगा।

एम-2 और एम-3 श्रेणी के वाहनों के लिए शुरुआती अवधि में दिन में 80 और रात में 60 किमी प्रति घंटा की सीमा तय की गई है। 15 नवंबर से यह घटकर क्रमश: 60 और 50 किमी प्रति घंटा हो जाएगी। मालवाहक वाहनों की गति सीमा शुरुआत में दिन में 60 और रात में 50 किमी प्रति घंटा रहेगी, जिसे 15 नवंबर से घटाकर दिन में 50 और रात में 40 किमी प्रति घंटा किया जाएगा। ये सीमाएं निर्धारित शीतकालीन अवधि में लागू रहेंगी या कोहरे की स्थिति में सुधार होने तक प्रभावी रहेंगी।

24 घंटे होगी निगरानी 

दीपक कुमार ने कहा कि संशोधित गति सीमाओं के अनुरूप स्वचालित यातायात प्रबंधन प्रणाली (एटीएमएस) की गति निगरानी व्यवस्था को समायोजित किया जाएगा। निर्धारित सीमा से अधिक गति पर चलने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सुरक्षा और गश्ती दल 24 घंटे सक्रिय रहेंगे। पुलिस के समन्वय से कोहरे में चल रहे वाहनों की पहचान की जाएगी।

एक्सप्रेसवे के प्रवेश और निकास बिंदुओं पर फॉग लाइट लगाई जाएंगी। संवेदनशील स्थानों, मोड़ों तथा नदियों और नालों के आसपास अतिरिक्त परावर्तक चिह्न और ब्लिंकर लगाए जाएंगे। रिफ्लेक्टिव टेप और साइनबोर्ड की जांच कर उनका रखरखाव सुनिश्चित किया जाएगा। टोल प्लाजा पर उद्घोषणा प्रणाली, रेडियो और एफएम चैनलों के माध्यम से यात्रियों को सुरक्षित वाहन संचालन और कोहरे में सावधानियों के प्रति जागरूक किया जाएगा। यूपीडा ने सभी तैयारियां पूरी करने और जरूरी सुधार सुनिश्चित करने के लिए 31 अक्तूबर की समय-सीमा तय की है।

 



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