राजधानी लखनऊ में रविवार को अखिल विश्व गायत्री परिवार के तत्वावधान में प्रांतीय शिक्षक गरिमा कार्यशाला का आयोजन हुआ। कार्यक्रम का आयोजन राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में हुआ। इसमें सीएम योगी आदित्यनाथ भी शामिल हुए। इस मौके पर उन्होंने कहा कि गायत्री परिवार की प्रतियोगिता में 11 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं जुड़े। आज का युवा ही भारत का भाग्य विधाता बनने वाला है। हम बिखरा-बंटा, जातीय खेमों में लड़ता भारत नहीं चाहते। ऐसा सोचने वाले पूर्वजों के प्रति श्रद्धा नहीं रखते हैं। हम ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ चाहते हैं, प्रधानमंत्री मोदी ने भी हम सबको ऐसे भारत के लिए कार्य करने के लिए कहा है।
गायत्री परिवार ने सर्वसमाज को जोड़ा
सीएम ने कहा कि गायत्री परिवार के पास डॉ. प्रणव पंड्या का मार्गदर्शन और डॉ. चिन्मय पंडया जैसे दूरदर्शी नायक हैं। इसलिए,परिवार को अगले 100 वर्ष के लिए लक्ष्य तय करना है। गायत्री परिवार को तनावग्रस्त, संघर्ष में उलझी, अस्तित्व के जूझती मानवता के जीवन में नया उजाला लाना है। जब देश पराधीन था और व्यक्ति हताश-निराश था, लोगों को लगता था कि गुलामी नियति बन चुकी है। तब ब्रजभूमि आगरा में जन्म लेकर भारतीय संस्कृति, सनातन मूल्यों व परंपरा के प्रति अगाध निष्ठा रखने वाले एक ऋषि का प्रादुर्भाव होता है। पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य ने मथुरा में प्रारंभिक साधना को बढ़ाते हुए हरिद्वार में जिस गायत्री परिवार की स्थापना की, उसने यज्ञों के माध्यम से सर्वसमाज को एक वेदी पर बैठाकर सामाजिक एकता का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया।