हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग ने राजकीय मेडिकल कालेज के प्रधानाचार्य को चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण महानिदेशक (डीजीएमई) बनाने की प्रकिया शुरू कर दिया है। बुधवार को प्रधानाचार्यो की वरिष्ठता सूची जारी कर उनसे सात दिन में आपत्ति मांगी है।
प्रदेश में डीजीएमई पद पर राजकीय मेडिकल कालेज के उस प्रधानाचार्य को प्रोन्नति देकर तैनात करने का नियम है, जो आयोग से चयनित हो और वरिष्ठतम हो। वर्ष 2023 में नियमावली में बदलाव किया गया। व्यवस्था दी गई कि प्रधानाचार्य के न होने की स्थिति में आईएएस को तैनात किया जाए। लेकिन वह सचिव रैंक से कम न हो।
इस बीच शासन की ओर से लगातार इस पद पर आईएएस की तैनाती है। प्रधानाचार्यों ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई। मांग की कि उनकी प्रोन्नति की जाए और डीजीएमई पद पर तैनाती की जाए। हाईकोर्ट ने चिकित्सा शिक्षा विभाग को निर्देश दिया कि प्रधानाचार्यो की सुनवाई किए बिना इस पद पर आईएएस की तैनाती न की जाए। इसके बाद भी इस पद पर आईएएस नेहा शर्मा को तैनात कर दिया गया।
प्रधानाचार्यों ने अवमानना याचिका दायर की। कोर्ट ने आदेश दिया कि प्रधानाचार्यो की सुनवाई की जाए अन्यथा मुख्य सचिव, चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव, नियुक्त एवं कार्मिक विभाग के मुख्य सचिव और डीजीएमई को व्यक्तिगत रूप से हाजिर होना पड़ेगा। इस आदेश के बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग बैकफुट पर आया।
कई दौर की बैठक के बाद दो सितंबर को प्रधानाचार्यो को प्रोन्नति कर डीजीएमई पर पर तैनाती की प्रकिया शुरु करने के आदेश दिए गए हैं। बुधवार को डीजीएमई नेहा शर्मा ने राजकीय मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत प्रधानाचार्य की वरिष्ठता सूची जारी की। सभी प्रधानाचार्यो को भेजे आदेश में कहा गया है कि यह अंतरिम सूची है। इसमें किसी को आपत्ति हो तो सात दिन ने दर्ज कराए।
