पावर आफिसर्स एसोसिएशन की बृहस्पतिवार को फील्ड हॉस्टल में हुई बैठक में दलित अभियंताओं के उत्पीड़न के एक- एक मामले पर चर्चा की गई। अभियंताओं ने आक्रोश जताते हुए आरोप लगाया कि ऊर्जा प्रबंधन के अफसर जानबूझकर उत्पीड़न कर रहे हैं। इस दौरान दो साल में हुए दलित उत्पीड़न के 20 मामलों की तथ्यात्मक रिपोर्ट मुख्यमंत्री को भेजने का फैसला लिया गया।
लखनऊ के फील्ड हॉस्टल में प्रदेशभर से जुड़े दलित एवं पिछड़े वर्ग के अभियंताओं ने विभिन्न जिलों में हुई कार्रवाई पर चर्चा की। अभियंताओँने कहा कि किसी भी अभियंता पर वित्तीय अनियमितता का आरोप नहीं है। कुछ को मात्र 21 दिन के कार्यकाल के आधार पर निलंबित किया गया। जिन लोगों को निलंबित किया गया है उनकी पत्रावलियां सालभर बाद भी अंतिम निर्णय तक नहीं पहुंची है। उसे जानबूझकर लंबित रखा गया है। इतना ही नहीं दलित वर्ग के मुख्य अभियंताओं की पदोन्नति रोकी गई।
हाईकोर्ट से बहाली के बाद भी निलंबन अवधि का आधा वेतन जब्त कर लिया गया और दो वेतन वृद्धियां रोकी दी गई। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि विभागीय नियमों के अनुसार अनुशासनात्मक मामलों का समयबद्ध निस्तारण होना चाहिए। छह माह से अधिक समय तक किसी मामले को लंबित रखना उचित नहीं है। इसका बाद भी एक से डेढ़ वर्ष तक अभियंताओं को निलंबित रखा गया है।