महाराष्ट्र और हरियाणा के बाद पिछले साल बिहार में हुए चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल में भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रखर हिंदुत्व का असर देखने को मिला है। सीएम ने पश्चिम बंगाल के जिन 22 विधानसभा सीटों पर चुनाव प्रचार किया था, उनसे में 19 सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज किया है। इनमें से एक अधिकांश सीटें ऐसी हैं जिनपर पहली बार भाजपा ने विजय पताका फहराया है।

भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने यूपी कुछ मंत्रियों के साथ और संगठन के मर्मज्ञ कुछ नेताओं के साथ ही पार्टी प्रखर हिंदुत्व चेहरे वाले सीएम योगी को भी स्टार प्रचारक बनाया था। योगी को खास तौर से उन सीटों पर प्रचार की कमान सौंपी गई थी, जहां पर हिंदू मतदाता जातियों में बिखरा था और टीएमसी के कार्यकर्ताओं से भयभीत था। यही वजह थी सीएम योगी ने इन सीटों पर चुनावी सभाओं और रोड के दौरान अपने चुनावी भाषणों में हिंदुत्व के साथ ही मतदाताओं को यह भरोसा भी दिया कि भाजपा की सरकार बनेगी तो यूपी की तरह प्रदेश में कानून-व्यवस्था तो सुधरेगी ही, साथ ही टीएमसी द्वारा बनाए गए भय के माहौल को भी खत्म कर दिया जाएगा।

योगी के प्रचार वाले सीटों के चुनाव नतीजों से यह भी साफ हो गया है कि उनके भाषण पर भरोसा करके जहां हिंदुओं ने एकजुट होकर भाजपा को मतदान किया किया, वहीं, टीएमसी से भयमुक्त होने का साहस दिखाया। माना जा रहा है सीएम योगी के भरोसे के साथ ही भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के माइक्रो मैनेजमेंट की वजह से 22 में से 19 सीटों पर भाजपा ने जीत हासिल की है। इनमें जो तीन सीटें हारी हैं, उनमें बोलपुर, उदय नारायणपुर और धनखली शामिल है।

बता दें कि इससे पहले सीएम ने हरियाणा के विधानसभा चुनाव में हिंदुत्व एजेंडे को धार देते हुए ‘बंटोगे तो कटोगे’ का नारा दिया था। बाद में इसी नारे का उपयोग महाराष्ट्र औ पिछले साल बिहार में हुए विधानसभा चुनाव में किया गया था। इस नारे का असर भी दिखा। हरिणाया में जहा सरकार सत्ता पर भाजपा का कब्जा बरकरार रहा, वहीं बिहार में पहली बार भाजपा को पूर्ण बहुमत मिला।

इन 19 सीटों पर मिली जीत

सोनामुखी, नंदाकुमार, कांथी दक्षिण, बाराबनी, तारापीठ मठ, मथाभंगा, धुपगुड़ी, बांकुरा, पिंगला, जॉयपुर, गारबेटा, जोरासैन्को, चकधा, नवादीप, कटवा, बागड़ा, कल्याणी, दमदम, राजरहहट गोपालपर।



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