पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने शिक्षण संस्थानों में गुरु-शिष्य परंपरा के कमजोर होने और शिक्षा व्यवस्था में आ रहे बदलावों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज विद्यार्थी कहलाने में गौरव नहीं, बल्कि कॉकरोच कहलाने में गर्व महसूस किया जा रहा है। कॉकरोच की पैदाइश के पीछे कोई है, जो फंडिंग कर रहा है। मंगलवार को साकेत महाविद्यालय में अवध विश्वविद्यालय महाविद्यालय शिक्षक संघ (आक्टा) की ओर से आयोजित सेवानिवृत्त शिक्षक सम्मान समारोह में उन्होंने ये बातें कहीं।

बृजभूषण शरण सिंह ने अपने पूर्व शिक्षकों डॉ. चट्टान सिंह और डॉ. एचबीवी सिंह को याद किया। अपने गुरु प्रो. एसएन त्रिपाठी को सम्मानित करने के लिए वह स्वयं मंच से नीचे उतरे और उनके चरणों में माला अर्पित की। इस दौरान वह भावुक हो गए। समारोह में नाका हनुमानगढ़ी के महंत रामदास ने आशीर्वचन दिया। विशिष्ट अतिथि फुफुक्टा के महामंत्री प्रो. प्रदीप कुमार सिंह ने शिक्षकों से शिक्षा और शिक्षण हितों की रक्षा के लिए संघर्ष करने का आह्वान किया।

महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. दानपति तिवारी ने बताया कि वर्ष 1951 में स्थापित साकेत महाविद्यालय में इस सत्र करीब 4500 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है। विश्वविद्यालय की ओर से उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान प्राप्त डॉ. अवधेश प्रताप सिंह को भी सम्मानित किया गया। आक्टा के प्रयास से चार दिवंगत शिक्षकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये की अनुकंपा राशि प्रदान की गई। आक्टा अध्यक्ष डॉ. जन्मेजय तिवारी ने आभार जताया, जबकि कार्यक्रम का संचालन प्रो. आशुतोष सिंह ने किया।

सेवानिवृत्त शिक्षकों को किया सम्मानित : समारोह में प्रो. सत्यप्रकाश त्रिपाठी, प्रो. बीपी सिंह, प्रो. जेबी पाल और प्रो. राजीव अग्रवाल समेत सेवानिवृत्त शिक्षकों को प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिह्न और अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर आक्टा महामंत्री प्रो. अमूल्य कुमार सिंह, मनूचा महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. मंजूषा मिश्रा, डॉ. धर्मपाल सिंह, प्रो. कविता सिंह, प्रो. अंजनी कुमार सिंह, प्रो. शक्ति सिंह, साकेत महाविद्यालय शिक्षक संघ के अध्यक्ष प्रो. आशीष प्रताप सिंह, महामंत्री डॉ. संतलाल और वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. रमेश प्रताप सिंह समेत अन्य शिक्षक उपस्थित रहे।



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