अमर उजाला, लखनऊ
Published by: Akash Dwivedi

Updated Sat, 19 Sep 2026 08:59 AM IST

उत्तर प्रदेश में पांच साल से कम उम्र के बच्चों में नाटेपन की समस्या कम हुई है। एनएफएचएस-5 में यह आंकड़ा 39.7 प्रतिशत था, जो एनएफएचएस-6 में घटकर 31.5 प्रतिशत रह गया। विशेषज्ञों के अनुसार बेहतर पोषण, स्वास्थ्य सेवाएं, टीकाकरण, स्तनपान और शुरुआती वर्षों में देखभाल से सुधार हुआ है।


UP Physical stature children improving prevalence short stature drops percentage

प्रदेश के नौनिहालों की बढ़ रही कद-काठी
– फोटो : अमर उजाला



विस्तार

प्रदेश में पांच साल से कम उम्र के बच्चों में नाटापन यानी उम्र के अनुपात में कम लंबाई की समस्या में कमी दर्ज की गई है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (एनएफएचएस-5) में जहां प्रदेश में ऐसे बच्चों का प्रतिशत 39.7 था, वहीं एनएफएचस-6 में यह घटकर 31.5 प्रतिशत रह गया है। यानी करीब चार वर्षों में नाटेपन के मामलों में 8.2 प्रतिशत अंक की कमी दर्ज की गई है।


राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की मिशन निदेशक डॉ. पिंकी जोवेल ने बताया कि बच्चे की लंबाई में होने वाला सुधार लंबे समय तक बेहतर पोषण, स्वास्थ्य सेवाओं और परिवार की देखभाल का परिणाम होता है। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय की बाल रोग विभाग की प्रोफेसर डॉ. शालिनी त्रिपाठी के अनुसार बच्चे के जीवन के शुरुआती 1000 दिन उसके शारीरिक और मानसिक विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं।

गर्भावस्था से लेकर बच्चे के दो वर्ष की उम्र तक पर्याप्त पोषण, नियमित स्वास्थ्य जांच, समय पर टीकाकरण, स्तनपान और उचित पूरक आहार पर ध्यान देने से कुपोषण की स्थिति को कम किया जा सकता है। नाटेपन को बच्चों में लंबे समय तक रहने वाले कुपोषण का महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है। एनएफएचएस-5 में उत्तर प्रदेश में पांच साल से कम उम्र के बच्चों में नाटापन 39.7 प्रतिशत दर्ज किया गया था।

 



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