सपा ने अंदरखाने पश्चिम बंगाल चुनाव के नतीजों से कई अहम सबक लिए हैं। राजनीतिक परामर्श फर्म के पेड वर्कर्स से ज्यादा राजनीतिक कार्यकर्ताओं से काम लिया जाएगा। वहीं, किसी भी मुद्दे पर आंदोलन से ज्यादा मतदाता सूची पर निगाह रखी जाएगी। सपा को आशंका है कि भाजपा मौका मिलते ही मतदाता सूची में खेल कर सकती है। अगर इन बातों पर ध्यान नहीं दिया तो सपा के लिए यह नुकसानदेह साबित होगा।
सपा के रणनीतिकार मानते हैं कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण (एसआईआर) से संबंधित पार्टी का काम तृणमूल कांग्रेस ने पूरी तरह से आई-पैक संस्था को सौंप दिया था। जबकि, यूपी में सपा ने इस काम में अपने कार्यकर्ताओं को पीडीए प्रहरी बनाकर लगाया। अंतर साफ दिखा कि फाइनल मतदाता सूची में तार्किक गलती और संदिग्ध श्रेणी के कारण पश्चिम बंगाल में 27.16 लाख वोट कटे, जबकि यूपी में नोटिस पाने वाले 3.26 करोड़ मतदाताओं में से सिर्फ 3.50 लाख का ही नाम मतदाता सूची से डिलीट हुआ।
