कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर सड़क धंसने और निर्माण संबंधी गंभीर खामियां सामने आने के बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने कड़ा कदम उठाया है। एनएचएआई ने एक्सप्रेसवे का निर्माण करने वाली कंपनी पीएनसी इंफ्राटेक को तीन साल के लिए अपनी परियोजनाओं की बोली प्रक्रिया से बाहर कर दिया है। इस अवधि में कंपनी एनएचएआई की नई परियोजनाओं में भाग नहीं ले सकेगी।
एनएचआई एक अधिकारी ने बताया गया है कि एक्सप्रेस-वे के कुछ हिस्सों में सड़क धंसने, सतह खिसकने और दरारें आने की शिकायतें सामने आई थीं। शुरुआती जांच में सड़क की आधार संरचना में पानी के प्रवेश और निर्माण गुणवत्ता से जुड़े सवाल उठाए गए हैं। मामले की तकनीकी जांच के लिए विशेषज्ञों की मदद भी ली जा रही है, ताकि सड़क खराब होने के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके।
एनएचएआई ने पीएनसी इंफ्राटेक को नॉन-परफॉर्मर भी घोषित किया है। इसके साथ ही, यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक्सप्रेस-वे पर टोल वसूली रोक दी गई है। सड़क की मरम्मत और सुरक्षा संबंधी सभी कमियां दूर होने तक वाहन चालकों से टोल नहीं लिया जाएगा। करीब 63 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेस-वे के निर्माण पर लगभग 4,700 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। इसका उद्घाटन 13 जुलाई को किया गया था। परियोजना का निर्माण आगरा स्थित पीएनसी इंफ्राटेक ने किया है। एनएचएआई की कार्रवाई से कंपनी की प्रतिष्ठा, आगामी सरकारी परियोजनाओं और वित्तीय प्रदर्शन पर असर पड़ने की आशंका है।
