प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा ने संगठन को चुनावी मोड में लाना शुरू कर दिया है। नए प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े ने जिम्मेदारी संभालने के बाद अब उत्तर प्रदेश में संगठन की जमीनी तैयारियों को परखने की तैयारी शुरू कर दी है। उनका पहला यूपी दौरा पांच सितंबर के बाद प्रस्तावित है। प्रभारी के दौरे को लेकर प्रदेश संगठन ने तैयारियां तेज कर दी हैं।
तावड़े के सामने संगठन अपनी चुनावी तैयारियों का पूरा खाका रखेगा। इसके लिए प्रदेश से लेकर मंडल और बूथ स्तर तक की सूचनाएं जुटाई जा रही हैं। खासतौर पर एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) के दौरान मतदाता सूची में कटे और जुड़े नामों का ब्योरा तैयार किया जा रहा है। संगठन यह भी देख रहा है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान बूथ स्तर पर पार्टी कार्यकर्ताओं की सक्रियता कैसी रही और किन क्षेत्रों में संगठन को अतिरिक्त मेहनत की जरूरत है।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक आगामी विधानसभा चुनाव में बूथ प्रबंधन भाजपा की रणनीति का अहम हिस्सा रहेगा। ऐसे में नए प्रभारी बूथ स्तर पर संगठन की वास्तविक स्थिति को समझने पर जोर दे सकते हैं। प्रत्येक बूथ पर पार्टी की टीम, पन्ना प्रमुखों की सक्रियता, मतदाता संपर्क और संगठन के विस्तार की स्थिति की जानकारी जुटाई जा रही है। प्रदेश संगठन की ओर से तैयार की जा रही रिपोर्ट में बूथवार स्थिति को भी शामिल किया जा रहा है। इसके आधार पर कमजोर बूथों की पहचान कर वहां संगठन को मजबूत करने की रणनीति बनाई जा सकती है। पार्टी की कोशिश है कि प्रभारी के दौरे से पहले संगठन के पास जमीनी स्तर की अद्यतन जानकारी उपलब्ध हो।
तावड़े के पहले दौरे को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि आगामी विधानसभा चुनाव परिणाम को भी तावड़े की रणनीतिक कौशल की ‘अग्निपरीक्षा’ के तौर पर ही देखा जाएगा। इसलिए तावड़े अब पार्टी संगठन के स्तर हर तरह से कील-कांटे को दुरुस्त करके अपनी बिसात बिछाने को लेकर सक्रियता से चुनाव की तैयारियों में जुटेंगे। माना जा रहा है कि प्रदेश प्रभारी सांगठनिक व्यवस्था और चुनावी तैयारियों की समीक्षा के बाद संगठन में जरूरी बदलाव और कमजोर कड़ियों को मजबूत भी करेंगे। ऐसे में उनका पहला दौरा सिर्फ औपचारिक नहीं, बल्कि संगठन की जमीनी तैयारियों की परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है।
