राजधानी में स्कूलों के बाहर सुरक्षा और यातायात संबंधी समस्याओं के मुद्दे पर हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने राज्य सरकार और पुलिस को अहम आदेश दिया है। पुलिस उपायुक्त (यातायात) लखनऊ से याचिका में प्रतिवादी सभी 17 स्कूलों के बाहर कैमरे लगाने और इस काम में होने वाले खचों के बारे में सूचित करने के लिए कहा है।
कोर्ट ने कहा कि इस संबंध में विस्तृत पत्र पुलिस उपायुक्त (यातायात) के कार्यालय की ओर से डीएम को भेजा जाएगा, जो जिला विद्यालय निरीक्षक के माध्यम से विद्यालयों को इसकी सूचना सुनिश्चित करेंगे। न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति वृजराज सिंह की खंडपीठ ने यह आदेश गोमती रिवरबैंक रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन की जनहित याचिका पर दिया।
इससे पहले न्यायमित्र ने अदालत के समक्ष मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) प्रस्तुत की। इसे लामार्टिनियर गर्ल्स कॉलेज के परामर्श से तैयार किया गया है। इसके अनुसार स्कूल ने खुद परिसर के चारों ओर 12 कैमरे लगाने का प्रस्ताव रखा। यह भी बताया कि इनका फुटेज यातायात पुलिस से साझा किया जा सकता है।
डीसीपी (ट्रैफिक) रवीना त्यागी ने अदालत को बताया कि स्कूलों की ओर से लगाए कैमरों को स्मार्ट सिटी के फीड से जोड़ने के लिए हर स्कूल से करीब 1,12,100 रुपये की जरूरत होगी। इसके अलावा कैमरों के रखरखाव और वाई-फाई कनेक्टिविटी सहित अन्य खचों के लिए हर माह करीब नौ हजार रुपये का खर्च होगा।
