राज्यसभा की 10वीं सीट के लिए पक्ष-विपक्ष एक-दूसरे के यहां सेंधमारी की तैयारी में जुटा हुआ है। सपा के पास तीसरी और भाजपा के पास 8वीं सीट जीतने के लिए पर्याप्त संख्या बल नहीं है। मतलब, 10वीं सीट तभी जीती जा सकेगी, जब क्रॉस वोटिंग हो। यानी, विधायक अपनी पार्टी की लाइन के खिलाफ जाकर वोट करें।
यह तय हो चुका है कि जेल में बंद सपा विधायक रमाकांत यादव वोट डालने नहीं आ पाएंगे। विधानसभा के 7 पद रिक्त हैं। ऐसे में अधिकतम 395 वोट ही पड़ सकेंगे। इस हिसाब से देखा जाए तो राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 36 वोटों की आवश्यकता होगी। सपा के पिछले राज्यसभा चुनाव में बागी हो चुके विधायकों को निकाल दें तो उसके पास कांग्रेस के दो विधायकों को मिलाकर 99 का ही संख्या बल है। जबकि, तीन सीटें जीतने के लिए उसे 108 मतों की आवश्यकता है। यानी, उसे 9 अतिरिक्त मतों का इंतजाम करना होगा।
सुभासपा के दो मत (अब्बास अंसारी और जगदीश नारायण राय) सपा को मिलना एकदम तय माना जा रहा है। जगदीश नारायण ने पिठले चुनाव में भी सपा प्रत्याशी कत्ही वोट दिया था। सपा के रणनीतिकारों का कहना है कि एनडीए में निषाद पार्टी और अपना दल (सोने लाल) के कुछ विधायक भी उनके संपर्क में हैं। यह वे विधायक हैं, जो टिकट की गारंटी पर पाला बदलने के लिए तैयार बताए जा रहे हैं।
सपा सूत्रों का दावा यहां तक है कि भाजपा सरकार में दो मंत्री ऐसे हैं, जिन्हें खुद भी इस बात की भनक है कि वे उनका टिकट कटेगा। इनमें से एक पश्चिम से हैं और वे रालोद के चलते असहज बताए जाते हैं। दूसरे एक मंत्री की सपा नेतृत्व से मुलाकात भी हो चुकी है। सपा सूत्रों का कहना है कि भाजपा के 6-7 विधायक भी उनके संपर्क में हैं, जो टिकट की गारंटी पर क्रॉस वोटिंग के लिए तैयार है। इसलिए सपा अपना तीसरा प्रत्याशी जिताने कि लिए अतिरिक्त मतों का इंतजाम आसानी से कर लेगी।
