राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले में एसआईटी की विस्तृत जांच में ट्रस्ट के पूर्व सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा और गणना इंचार्ज सुभाष श्रीवास्तव की मुख्य भूमिका बताई गई है। अनिल की संलिप्तता होने की ओर इशारा किया गया है। एसआईटी की रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद अनिल पर भी कानूनी शिकंजा कसना लगभग तय है। सुभाष पहले से ही जेल में बंद है।




सूत्रों के मुताबिक, विस्तृत जांच में एसआईटी ने ट्रस्ट के पदाधिकारियों की भूमिका खंगाली। जिसमें अनिल मिश्रा की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। उसके पुख्ता साक्ष्य हैं। वहीं, इस बात की भी पुष्टि हुई है कि अनिल की सिफारिश से सबसे अधिक लोग मंदिर में नौकरी पर रखे गए थे। अनिल और सुभाष की भूमिका बेहद संगीन मानी गई है। मतलब चोरी आंखों के सामने हो रही थी, लेकिन इन दोनों ने नहीं रोका। इसलिए अनिल की मिलीभगत की आशंका जताई गई है। वहीं, अगर चंपत राय की भूमिका की बात करें तो उन पर कानूनी कार्रवाई की सिफारिश एसआईटी जांच में नहीं की गई है। आपराधिक घटना में उनकी संलिप्तता का जिक्र नहीं किया गया है।



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