राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण की जांच अब ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों तक पहुंचती दिखाई दे रही है। सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियां जल्द ही श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देवगिरी से पूछताछ करेंगी। जांच का फोकस इस बात पर रहेगा कि ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष के रूप में दानराशि के प्रबंधन, वित्तीय निगरानी और जवाबदेही के संबंध में उनकी क्या भूमिका रही और उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किस प्रकार किया।


सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसियां यह जानना चाहती हैं कि चढ़ावे की गणना, बैंक में जमा करने और पूरी वित्तीय प्रक्रिया की निगरानी किस तरह की जा रही थी। साथ ही यह भी पड़ताल की जाएगी कि व्यवस्था में कहीं कोई चूक हुई थी या नहीं और यदि हुई तो उसकी जवाबदेही किस स्तर पर तय होती है।

जांच का एक अहम आधार ट्रस्ट और बैंक के बीच दानराशि की गणना, जमा और प्रबंधन को लेकर हुआ एमओयू (समझौता पत्र) भी है। सूत्रों के अनुसार, इस समझौते पर कोषाध्यक्ष गोविंद देवगिरी के भी हस्ताक्षर हैं। ऐसे में जांच टीम यह समझने का प्रयास करेगी कि एमओयू में निर्धारित दायित्वों का पालन पूरी तरह हुआ या नहीं तथा वित्तीय निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी थी।



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