आगरा एक्सप्रेसवे के निर्माण के दौरान वर्ष 2015 में काकोरी ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय माधवपुर और पूर्व माध्यमिक विद्यालय जलियामऊ के भवन ढहा दिए गए थे। 11 साल बाद भी इनके नए भवन नहीं बन सके हैं। अब दोनों विद्यालय करीब आधा किलोमीटर दूर प्राथमिक विद्यालय जलियामऊ के परिसर में चल रहे हैं। एक भवन में तीन विद्यालयों के संचालन और सुविधाओं की कमी का असर नामांकन पर पड़ा है। दोनों स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या 300 से घटकर 65 रह गई है।
संवाद न्यूज एजेंसी की पड़ताल में विद्यालय में उपलब्ध पांच कमरों में तीनों स्कूलों की कक्षाएं संचालित मिलीं। कमरों की कमी के चलते कई बार बच्चों को मैदान में बैठाकर पढ़ाना पड़ता है। शिक्षकों के सामने भी तीन विद्यालयों की कक्षाएं संचालित करने की चुनौती रहती है। स्थानीय लोगों और शिक्षकों के मुताबिक वर्ष 2015 में भवन हटाए जाने के समय प्राथमिक विद्यालय माधवपुर में करीब 150 और पूर्व माध्यमिक विद्यालय जलियामऊ में भी करीब 150 विद्यार्थी थे।
ये भी पढ़ें – यूपी: बसपा के दिवंगत विधायक उमाशंकर सिंह को देना होगा 400 करोड़ रुपये से अधिक आयकर, जल्द होगी वसूली
ये भी पढ़ें – यूपी में राज्यसभा चुनाव: जयंत चौधरी के हाथ आई मायूसी, लग रहीं थीं एनडीए कोटे से राज्यसभा भेजने की अटकलें
शिक्षकों का कहना है कि पर्याप्त बैठने की व्यवस्था और सुविधाएं नहीं होने से अभिभावक बच्चों का नामांकन कराने से कतरा रहे हैं। पड़ताल में यह भी सामने आया कि प्राथमिक विद्यालय माधवपुर के एक बच्चे की सर्विस लेन पार करने के दौरान मौत हो गई थी। इसके बाद ज्यादातर अभिभावकों ने बच्चों को प्राथमिक विद्यालय जलियामऊ भेजने से इन्कार कर दिया। क्षेत्र में करीब 10 निजी विद्यालयों को भी मान्यता मिली हुई है। आर्थिक रूप से सक्षम परिवार बच्चों को निजी स्कूलों में भेज रहे हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के कई बच्चे दूर स्कूल होने के कारण पढ़ाई से दूर हो रहे हैं।
2015 में जमीन मिली अब भी निर्माण का इंतजार
प्राथमिक विद्यालय माधवपुर के नए भवन के लिए एक्सप्रेसवे की सर्विस लेन के पास वर्ष 2015 में तत्कालीन जिलाधिकारी राजशेखर ने जमीन आवंटित की थी। विभागीय रिकॉर्ड में भी जमीन आवंटन दर्ज होने की बात कही जा रही है। इसके बावजूद निर्माण शुरू नहीं हो सका। शिक्षकों का कहना है कि सड़क किनारे होने के कारण जमीन पर कब्जे का खतरा बढ़ सकता है। वहीं, विद्यालयों के निर्माण का मामला विभागीय अधिकारियों, विधायक और मुख्यमंत्री कार्यालय के संज्ञान में भी लाया गया, पर मामला सिफर है
बीएसए विपिन कुमार का कहना है कि मामला वर्ष 2015 का है। जानकारी मिलने के बाद विभागीय उच्च अधिकारियों और शासन को पत्राचार किया गया है। विद्यालय निर्माण के लिए बजट यूपीनेडा को उपलब्ध कराना है, क्योंकि विद्यालय उसी के कार्य के दौरान गिराए गए थे। बजट जल्द मिल सके, इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
