कानपुर में ससुर विनीत मिनोचा की हत्या के 10 दिन बाद बुधवार को पहली बार शालू जेल से बाहर निकली। आसमानी रंग के सूट और सफेद दुपट्टे में शालू का चेहरा उसके ताव भरे तेवरों से लाल था। पुलिस कस्टडी रिमांड (पीसीआर) की सुनवाई के लिए कचहरी पहुंची शालू महिला पुलिस कर्मियों से कभी मीडिया को दूर करने की बात कहती, तो कभी दुपट्टे से चेहरा ढक लेती।
उसकी निगाहें भीड़ के बीच मानो पति सुब्रत को तलाश रही थीं। करीबियों के अनुसार शालू जानती थी कि सुब्रत नहीं आएगा, फिर भी वह उसको बस एक बार देखना चाहती थी। इस दौरान शालू के भाई-बहन जरूर मौजूद रहे। कचहरी से लौटते वक्त शालू कभी गुस्से में तो कभी मायूस सी दिख रही थी, लेकिन ससुर की हत्या का अफसोस का भाव एक क्षण के लिए भी उसके चेहरे पर नहीं दिखा।
