वृंदावन के चैतन्य विहार स्थित राजकीय बालगृह (बालिका) में मोबाइल मिलने के शक के बाद प्रभारी अधीक्षिका ने जब सघन जांच की तो बैरकों से 11 मोबाइल फोन और चार्जर मिले। बताया गया कि इसी बात को लेकर झगड़ा और कर्मचारियों से अभद्रता भी हुई। इसे गंभीरता से लेते हुए उन्होंने कोतवाली में बाहरी व्यक्तियों और संस्थान में रह रहीं बालिकाओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है।

1 जून की शाम को संस्थान की महिला कर्मचारियों द्वारा आवासीय कक्षों में मोबाइल होने के संदेह पर सघन तलाशी अभियान चलाया गया था। इस दौरान कर्मचारियों ने बैरकों से 11 मोबाइल हैंडसेट और चार चार्जर बरामद किए। संस्थान की प्रभारी अधीक्षिका ने पुलिस को बताया कि सभी मोबाइल फोन बाहरी व्यक्तियों द्वारा आपराधिक साजिश के तहत बालिकाओं तक पहुंचाए गए थे।

मोबाइल मिलने के बाद, बालिकाओं के माध्यम से साजिश के तहत सरकारी संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचाया गया। वहां रह रहीं अन्य मूक बधिर बालिकाओं और ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए उन पर हमला भी किया गया।

सीओ सदर पीतम पाल सिंह ने बताया कि मामले की जांच उप निरीक्षक अरुण डागर को सौंपी है। पुलिस बरामद किए गए सिम कार्डों के डिटेल के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बालिका गृह के अंदर ये मोबाइल फोन किस माध्यम से और किन बाहरी लोगों द्वारा पहुंचाए गए थे। डीपीओ विकास चंद्र ने बताया कि रात का बच्चों के बीच झगड़ा हो गया था। जिसे शांत कराया दिया गया है। जब बच्चे आते हैं तो अपने साथ मोबाइल ले आते हैं। चैकिंग में वह मोबाइल ले लिए जाते हैं।

 



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