आगरा में सिस्टम की लापरवाही से एक बार फिर सड़क पर खून बहा। टीटीजेड प्राधिकरण ने इसी साल अप्रैल महीने में जिला प्रशासन, पुलिस कमिश्नरेट, एनएचएआई और आरटीओ को पत्र लिखा था। यह नेशनल हाईवे-19 से गुजरने वाले भारी वाहनों को उत्तरी बाईपास से निकालने के संबंध था।

पत्र लिखने के बावजूद सरकारी तंत्र की उदासीनता से बृहस्पतिवार दोपहर करीब 1:30 बजे नेशनल हाईवे-19 (वाटरवर्क्स फ्लाईओवर) पर बेकाबू ट्रक ने बाइक सवार जीशान अली की जान ले ली। टूंडला के न्यू शिवनगर निवासी जीशान अली नोएडा की मिर्जा मीट कंपनी में मार्केटिंग सुपरवाइजर थे। वह अपने बूढ़े मां-बाप का इकलौता सहारा थे और रोजाना बाइक से आगरा के होटलों व रेस्टोरेंटों से मिलने वाले मीट ऑर्डर की डिलीवरी व निगरानी करते थे।

ताज ट्रैपेजियम जोन (टीटीजेड) प्राधिकरण के उपाध्यक्ष की ओर से 10 अप्रैल को आरटीओ (प्रवर्तन), एनएचएआई और पुलिस उपायुक्त (यातायात) को सख्त निर्देश दिए गए थे। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए शहर के भीतर गैर-आगरा गंतव्य वाले भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाने और उन्हें सीधे बाईपास पर मोड़ने का आदेश दिया गया था लेकिन टीटीजेड के इन सख्त आदेशों को जिम्मेदार अफसरों ने रद्दी की टोकरी में फेंक दिया। न तो बाईपास पर चेकिंग का कोई तंत्र लागू हुआ और न ही हाईवे पर अंधाधुंध दौड़ते भारी वाहनों पर लगाम कसी गई।

स्मार्ट सिटी का दावा खोखला

पूरे शहर में करोड़ों रुपये फूंककर स्मार्ट सिटी के कैमरे टांगे गए हैं लेकिन हाईवे पर बेकाबू डंपर, टैंकर और ट्रकों की निगरानी का कोई ठोस तंत्र ही मौजूद नहीं है। हादसा करने के बाद चालक ट्रक लेकर आसानी से भाग गया और पुलिस सिर्फ रामबाग व सुल्तानगंज पुलिया के सीसीटीवी खंगालने की औपचारिकता कर रही है। एसीपी छत्ता श्वेता वर्मा का कहना है कि आरोपी चालक की तलाश की जा रही है लेकिन सवाल यह है कि जब तक पुलिस चेतती है, तब तक वाहन मीलों दूर निकल चुका होता है।

इन सवालों के कौन देगा जवाब

क्या टीटीजेड और सुप्रीम कोर्ट के आदेश केवल फाइलों की शोभा बढ़ाने के लिए हैं?

कागजों में आदेश जारी कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने वाले अफसरों पर कार्रवाई कब होगी?

बूढ़े माता-पिता के आंसुओं और जीशान की असमय मौत का हिसाब अब कौन देगा?



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