यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में ‘पद छूटा पर मोह नहीं’ की कहानी। इसके अलावा ‘गठबंधन पर ग्रहण’ और ‘साहब को देख माननीय ने बदला रास्ता’ के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी…

पद छूटा पर मोह नहीं

भगवा दल में हाल में सांगठनिक बदलाव में एक नेताजी को प्रमोशन देकर क्षेत्र से प्रदेश स्तरीय पद तो दे दिया गया लेकिन उनका क्षेत्र वाले पद से मोहभंग नहीं हो रहा है। तभी तो नेताजी उस पद का काम भी अब तक अपने हिसाब से चला रहे हैं। काशी से ताल्लुक रखने वाले नेताजी की जगह दूसरे नेताजी की ताजपोशी हुई है लेकिन वह बेचारे पिछले नेताजी के सामने कुछ कर ही नहीं पा रहे हैं। हाल में ही क्षेत्र के विधानसभा प्रभारियों की सूची जारी हुई है। चर्चा है कि ये वही सूची है जो पद पर रहते हुए नेताजी ने तैयार कर रखा है। अब मौजूदा नेताजी खुद को असहाय पा रहे हैं।

गठबंधन पर ग्रहण

वे 100 से कम सीटों पर लड़ने को तैयार नहीं, ये 50 से ज्यादा देने को तैयार नहीं। लड़ाई आधे बनाम दोगुने की है। बिहार के सबक सामने हैं। ऐसे में हैरत नहीं कि ऐन वक्त पर खुद को बड़ा भाई बताने वाले गठबंधन में आने से इन्कार कर दें। समीकरण कुछ ऐसे बैठ रहे हैं कि संभावना अलग-अलग जोर आजमाइश की लग रही है। दूसरे को लग रहा है कि अलग हुए तो बेहतर ढंग से लड़ सकेंगे।

साहब को देख माननीय ने बदला रास्ता

एयरपोर्ट की घटना खाकी वाले साहब का पीछा नहीं छोड़ रही है। घटना के लंबे समय बाद भी लोग उनकी दागदार छवि से दूर ही रहना पसंद कर रहे हैं। तभी तो केंद्र वाले एक माननीय ने भी उनको देखते ही रास्ता बदल दिया। दरअसल पिछले दिनों एनसीआर में लगे अंतरराष्ट्रीय मेले में खाकी विभाग के स्टाल पर साहब बतौर नोडल तैनात थे। मेले के आयोजन पर मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंचे केंद्र वाले माननीय स्टाल देख रहे थे। वह खाकी वाले स्टाल से पहले वाले स्टाल पर पहुंचे तो नजर साहब पर पड़ी। खाकी वाले साहब भी फुल ड्रेस में माननीय का स्वागत करने को उत्सुक थे लेकिन उन्हें देखते ही माननीय ने रास्ता बदल लिया।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *