अलीगढ़ के बाजार में अगर आप देसी घी खरीदने जा रहे हैं तो उसकी सुगंध पर न जाएं, बाजार में सस्ते में मिलने वाला देसी घी मिलावटी या सिंथेटिक हो सकता है। मात्र 40 रुपये के अर्क (बटर एसेंस) से 15 किलो घी तैयार कर बेचा जा रहा है। ऐसे में पता नहीं चलेगा कि पैकिंग में बिकने वाला कौन सा घी असली है और कौन सा नकली।

गुणवत्ता के मानकों पर खरा नहीं उतरने पर हाल ही में खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) विभाग ने छह नामी कंपनियों के देसी घी उत्पाद पर प्रतिबंध लगाया है। देसी घी बिक्री से जुड़े कारोबारियों की मानें तो अलीगढ़ में 20 टन से ज्यादा माल की हर दिन खपत है, जिसमें काफी माल ब्रांडेड कंपनियों का बिकता है और कुछ खुला बिक्री वाला माल भी बिकता है।

जिले में करीब छह बड़ी नामी कंपनियां देसी घी बना रही हैं, जबकि दस से ज्यादा बाहरी कंपनियों के उत्पाद बाजार में बिक्री के लिए आ रहे हैं। इन सभी के द्वारा नियमित अपने बैच की जांच खुद की स्थापित या निजी प्रयोगशालाओं में कराई जाती है। इसमें जांच मानक (बीआर, आरएम, सेपोनिफिकेशम, आयोडीन, कलर) आदि की रिपोर्ट का उल्लेख बैच पर किया जाता है। इसके बाद एफडीए स्तर से भी समय समय पर नमूने लेकर जांच कराई जाती है।


बाजार में बिकने वाला देसी घी ब्रांडेंड कंपनियों द्वारा प्रयोगशालाओं में जांच के बाद ही बेचा जाता है। इसके अलावा विभाग भी समय-समय पर नमूने लेकर जांच करता है। हाल ही में छह कंपनियों के ब्रांड प्रतिबंधित किए गए हैं। लोगों से अपील है कि अच्छे ब्रांड पर ही भरोसा कर सकते हैं। जो ब्रांड बाजार में कम दिखते हैं और सस्ते में बेचे जाते हैं, उन पर भरोसा न करें।-डा.दीनानाथ यादव, सहायक आयुक्त एफडीए




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