नगर निगम सदन की बैठक की पूर्व संध्या पर रविवार को निजी होटल में महापौर और सभी पार्षदों के साथ हुए मंथन में आखिरकार बीजेपी पार्षद दल के नेता को मंच पर जगह मिल ही गई। जबकि पिछली बैठकों तक मंच पर बैठने वाले निवर्तमान पार्षद दल के नेता पार्टी के अन्य पार्षदों के साथ बैठे। अचानक हुए इस प्रोटोकॉल के पालन को सोमवार को होने वाली सदन की बैठक से जोड़कर देखा जा रहा है।

नगर निगम में 20 अप्रैल को होने वाली सदन की बैठक पार्षदों के हंगामे की भेंट चढ़ गई थी। बैठक शुरू होने से पहले पहले सत्ता और फिर विपक्ष के पार्षदों ने बहिष्कार कर दिया था। अब सोमवार को फिर से बैठक होने जा रही है। लंबे समय से चली आ रही परंपरा के अनुसार रविवार को महापौर बिहारी लाल आर्य ने निजी होटल में पार्षदों के साथ बैठक की। मेयर ने कहा कि सदन अपनी बात रखने के लिए होता है। सभी पार्षदों को बराबरी से बात रखने का मौका दिया जाएगा। जरूरत पड़ी तो दो दिन सदन चलाएंगे। हालांकि, पिछली बैठक के मुकाबले इस बार की बैठक सामान्य रही। अधिकतर पार्षद भी शांत बैठे रहे लेकिन बैठक में सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाली बात बीजेपी पार्षद दल के नेता नरेंद्र नामदेव को मंच पर जगह मिलना था। उनके साथ मेयर समेत तीन और लोग ही मंच पर बैठे नजर आए। एक हफ्ते पहले हुई पिछली बैठक में उन्हें जगह नहीं मिली थी। जबकि निवर्तमान पार्षद दल के नेता दिनेश प्रताप सिंह मंच पर बैठे थे। रविवार को दिनेश प्रताप सिंह पार्षदों के साथ बैठे नजर आए।

काम न होने से लेकर सिटिंग व्यवस्था पर रखी बात

बैठक के दौरान पार्षद सुशीला दुबे ने कहा कि सत्ता और विपक्ष के पार्षदों के बैठने के लिए स्थान तय होना चाहिए। सुनील नैनवानी और प्रियंका साहू ने काम न होने का मुद्दा उठाया। प्रवीण लखेरा ने भी कहा कि कार्यकारिणी की बैठक में तय हुआ था कि उनके वार्ड में स्वीकृत काम को मंजूरी दी जाएगी लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ।



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