अनियमित दिनचर्या, फास्टफूड का अधिक सेवन, मोबाइल के घंटों उपयोग और देर रात जागने के कारण बालिकाओं में पुरुष हार्माेंस (टेस्टोस्टेरोन) का स्तर बढ़ रहा है। इससे आवाज भारी, चेहरे पर बाल और शारीरिक बनावट पुरुषों जैसी हो रही है। एसएन मेडिकल कॉलेज के एंडोक्राइनोलॉजी विभाग के अध्ययन में तीन फीसदी बालिकाएं इससे प्रभावित मिली हैं। इससे बांझपन का खतरा भी बढ़ जाता है।

एंडोक्राइनोलॉजी विभाग के डॉ. धर्मेंद्र तिवारी ने बताया कि ओपीडी में आने वाली 8-18 साल की 852 बालिकाओं पर बीते आठ महीने में किए गए अध्ययन में 3.1 फीसदी में टेस्टोस्टेरोन का स्तर बढ़ा मिला। महिलाओं में टेस्टोस्टेरोन का स्तर अधिकतम 59 एनजी/डीएल (नैनोग्राम प्रति डेसीलीटर) होता है, लेकिन पीड़ित बालिकाओं में यह 200 एनजी/डीएल तक मिला।

 



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