मौसम में बदलाव से वायरल फीवर के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। मेडिसिन और बाल रोग विभाग की ओपीडी में इसके 70 फीसदी मरीज हैं। स्वाइन फ्लू की स्क्रीनिंग भी की जा रही है। अब तक किसी में इसके गंभीर लक्षण नहीं मिले हैं।

मेडिसिन विभाग के डॉ. जितेंद्र दौनेरिया ने बताया कि ओपीडी में रोजाना औसतन 650 मरीज आ रहे हैं। इनमें से 60-70 फीसदी को वायरल फीवर के हैं। इसमें जुकाम-खांसी, गले में खराश-सूजन, मांसपेशियों-सिर में दर्द की परेशानी मिल रही है। मेडिसिन विभाग के डॉ. मनीष बंसल ने बताया कि तेज बुखार के साथ ठंड लगना, सांस फूलने, उल्टी-दस्त पर स्क्रीनिंग कर मरीज की स्वाइन फ्लू की जांच करा रहे हैं।

राहत की बात है कि इन्फ्लुएंजा एच1एन1 की पुष्टि नहीं हो रही है। बुखार होने पर पैरासिटामॉल लें, आराम नहीं मिलने पर चिकित्सक को दिखाएं। बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. पंकज कुमार ने बताया कि वायरल फीवर के मरीज मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बच्चों में तेज बुखार, उल्टी-दस्त, पेट में दर्द, जुकाम-खांसी की परेशानी मिल रही है। स्वाइन फ्लू के खतरे को देखते हुए ओपीडी में स्क्रीनिंग भी की जा रही है।

आर्सेनिक-30, बेलाडोना-30 लें

उत्तर प्रदेश होम्योपैथिक कांग्रेस साइंस के अध्यक्ष डॉ. कैलाश चंद सारस्वत ने बताया कि वायरल फीवर में आर्सेनिक-30 और बेलाडोना-30 की तीन-तीन बूंदें सुबह-शाम ले सकते हैं। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ दर्द में आराम मिलता है। राहत नहीं मिलने पर चिकित्सक को दिखाएं।

इन बातों का रखें ध्यान

जुकाम-खांसी और बुखार आने पर खुद को क्वारंटीन करें।

मास्क लगाएं और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर बेवजह जाने से बचें।

खांसते-छींकते वक्त मुंह पर रुमाल रखें।

दूषित और खुले में बिकने वाली सामग्री खाने-पीने से बचें।

 



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

अभी अभी की खबरें