सुमेरपुर क्षेत्र के उच्च प्राथमिक विद्यालय कैथी कंपोजिट स्कूल एक बार फिर सुर्खियों में है। जांच में एमडीएम पंजिका तथा आईवीआरएस कॉल में दर्ज बच्चों की संख्या में अंतर मिलने पर मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक संतोष कुमार देव पांडेय ने दोषी शिक्षक के खिलाफ विभागीय नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
जानकारी के मुताबिक 16 मई 2026 को विद्यालय का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान विद्यालय में मात्र 49 बच्चे उपस्थित मिले, जबकि इससे पूर्व के दिनों में मध्यान्ह भोजन पंजिका में 300 से 350 बच्चों की उपस्थिति दर्ज पाई गई थी। एक दिन की वास्तविक उपस्थिति और पंजिका में दर्ज संख्या के बीच भारी अंतर ने विद्यालय संचालन और मध्यान्ह भोजन योजना पर सवाल खड़े कर दिए।
निरीक्षण के दौरान यह भी पाया गया कि निरीक्षण समय तक बच्चों की उपस्थिति पंजिका में हाजिरी अंकित नहीं की गई थी। वहीं, मध्यान्ह भोजन पंजिका में भोजन ग्रहण करने वाले बच्चों का भी स्पष्ट अंकन नहीं मिला। प्रथम दृष्टया यह आशंका जताई गई कि तत्कालीन प्रभारी प्रधानाध्यापक राजेश कुमार द्वारा बच्चों की फर्जी उपस्थिति दर्ज कर मध्यान्ह भोजन योजना में खाद्यान्न एवं वित्तीय अनियमितता की जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए खंड शिक्षा अधिकारी सुमेरपुर और जिला समन्वयक एमडीएम को संयुक्त जांच के निर्देश दिए गए थे। संयुक्त जांच में कई गंभीर खामियां सामने आईं। जांच टीम के अनुसार विद्यालय के वित्तीय अभिलेख, विशेषकर बिल-बाउचर का समुचित रखरखाव नहीं किया गया था।
जांच में यह भी सामने आया कि 16 मई और चार जुलाई 2026 के निरीक्षण के दौरान शासन द्वारा निर्धारित मीनू और मानकों के अनुरूप बच्चों को गुणवत्तापूर्ण मध्यान्ह भोजन नहीं दिया गया। खाद्यान्न से संबंधित अभिलेख और आवश्यक साक्ष्य भी जांच टीम के समक्ष प्रस्तुत नहीं किए जा सके। इसके अलावा एमडीएम पंजिका में दर्ज भोजन ग्रहण करने वाले बच्चों की संख्या और आईवीआरएस कॉल के माध्यम से दी गई सूचना में भी अंतर पाया गया। विद्यालय संचालन से जुड़ी अन्य व्यवस्थाएं भी संतोषजनक नहीं मिलीं थी।
जांच आख्या के आधार पर मामले को शिक्षा निदेशक (बेसिक) के समक्ष भेजा गया था। शिक्षा निदेशक संतोष कुमार देव पांडेय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है कि विद्यालय में एमडीएम योजना और अन्य व्यवस्थाओं में पाई गई अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार शिक्षक के खिलाफ विभागीय नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाए।
उन्होंने यह भी निर्देश दिए हैं कि की गई कार्रवाई से निदेशालय को अवगत कराया जाए।
अमर उजाला की खबर के बाद दिखी सख्ती
औचक निरीक्षण में मिली खामियों के बाद तत्कालीन एडी बेसिक ने बीएसए को जांच कर अग्रिम आदेश तक वेतन आहरण पर रोक लगाने के निर्देश दिए थे। उक्त आदेश को कचरे में डाल दिया गया। वेतन नहीं रोका गया तब अमर उजाला ने 14 जुलाई 2026 के अंक में खबर प्रकाशित की। इसके बाद अधिकारी हरकत में आए। 24 जुलाई और 10 अगस्त के अंक में भी खबर प्रकाशित हुई। उधर एडी बेसिक का भी स्थानांतरण हो गया। खबरों को संज्ञान लिया और कार्रवाई के आदेश जारी हुए।
