हाथरस नगर क्षेत्र के 19 परिषदीय विद्यालयों के 1200 विद्यार्थियों की पढ़ाई शिक्षा मित्रों और अनुदेशकों के सहारे रह गई है। प्रदेश के मुख्य सचिव एसपी गोयल के सख्त निर्देशों के बाद भी इन स्कूलों में दो-दो सहायक अध्यापकों की तैनाती अब तक नहीं हुई है। शैक्षिक सत्र 2026-27 शुरू हुए 38 दिन बीत चुके हैं, लेकिन बीते कुछ वर्षों से इन विद्यालयों के हालात जस के तस हैं।

संवाद न्यूज एजेंसी की पड़ताल में यह चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। हाथरस नगरीय क्षेत्र के करीब 17 विद्यालय ऐसे हैं, जहां नियमित सहायक अध्यापकों के अभाव में शिक्षण कार्य मुख्य रूप से शिक्षा मित्रों और अनुदेशकों के भरोसे चल रहा है। सिकंदराराऊ के दो नगरीय स्कूलों को अनुदेशकों के भरोसे छोड़ दिया गया है। वर्षों से स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति न होने के कारण इन स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।

इससे भी चिंताजनक बात यह है कि जब शिक्षा मित्रों या अनुदेशकों को अन्य शासकीय कार्यों जैसे एसआईआर, सर्वे, चुनाव ड्यूटी या अन्य प्रशासनिक कार्य में लगाया जाता है, तो विद्यालयों में पढ़ाई पूरी तरह ठप हो जाती है। पड़ताल में यह भी सामने आया कि औपचारिकता पूरी करने के लिए एक-एक शिक्षक को दो से चार विद्यालयों का अतिरिक्त प्रभार दे दिया जाता है। ऐसे शिक्षक नियमित रूप से किसी एक विद्यालय में उपस्थित नहीं रह पाते। जिससे उनकी तैनाती का उद्देश्य अधूरा रह जाता है।

इंटर कॉलेज के वरिष्ठ सेवानिवृत्त शिक्षक नरेश चंद्र गुप्ता का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए आवश्यक है कि रिक्त पदों पर जल्द ही शिक्षकों की नियुक्तियां की जाएं। विद्यालयों में नियमित शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, ताकि विद्यार्थियों का भविष्य संवारा जा सके।



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