मुजफ्फरनगर के 27 साल पुराने अपहरण और हत्या के मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट नंबर-3 का फैसला लंबे समय से चल रही कानूनी लड़ाई का अहम पड़ाव है। अदालत ने आरोपी शाहनवाज को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई। मामला 9 दिसंबर 1999 को शुरू हुआ था, जब तमंचों के बल पर हारुन और मुकर्रम का अपहरण किए जाने का आरोप लगा था। मुकर्रम बाद में लौट आया, जबकि हारुन करीब 48 दिन तक बंधक रहा और उसके बदले पांच लाख रुपये की फिरौती मांगी गई। 19 जनवरी 2000 को फिरौती की व्यवस्था के सिलसिले में गए हारुन के पिता सालिम को कथित तौर पर बंधक बना लिया गया और 25 जनवरी को उनकी हत्या कर दी गई। करीब तीन दशक बाद आए इस फैसले से पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की भावना जरूर पैदा हुई है, हालांकि मृत्युदंड के मामलों में आगे की न्यायिक प्रक्रिया और अपील के कानूनी रास्ते अभी महत्वपूर्ण रहेंगे।



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