फोटो 10::उपकृषि निदेशक कार्यालय में फार्मर रजिस्ट्री के बारे में जानकारी करते किसान। संवाद

फोटो 11::फार्मर रजिस्ट्री पर कुछ इस प्रकार पेंडिंग लिखकर आ रहा है। स्रोत-पोर्टल

फोटो 12::उमाकांत त्रिपाठी। संवाद

फोटो 13::चंदन तिवारी। संवाद

एक्सक्लूसिव का लोगो

दो लाख से अधिक किसान आईडी बनीं, सत्यापन में सुस्ती से कार्यालयों के चक्कर लगा रहे किसान

भरथना तहसील की सबसे खराब स्थिति, सम्मान निधि सहित कई योजनाओं से वंचित रह सकते किसान

ऋषि तिवारी

इटावा। किसानों को डिजिटल पहचान से जोड़ने और सरकारी योजनाओं का लाभ देने के लिए फार्मर रजिस्ट्री अभियान चलाया जा रहा है लेकिन अभियान राजस्व विभाग की लापरवाही का शिकार हो गया।

फार्मर रजिस्ट्री के जिन मामलों को एक सप्ताह के अंदर निस्तारित कर देना चाहिए वे मामले महीने से लंबित पड़े हैं। स्थिति यह है कि जिले में 9,244 आवेदन लेखपाल स्तर पर लंबित हैं जिससे परेशान होकर किसानों को बार-बार तहसील और जनसेवा केंद्रों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

जिले में किसान रजिस्ट्री का लक्ष्य 2,78,014 किसानों का निर्धारित किया गया है। इसके तुलना में अब तक 2,05,937 किसान आईडी तैयार हो चुकी हैं लेकिन अभियान की गति अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच सकी है। अभी भी 72,077 किसानों ने फार्मर रजिस्ट्री नहीं कराई हैं।

अभियान की प्रगति पर नजर डालें तो जिले में कुल उपलब्धि 74.07 प्रतिशत दर्ज की गई है हालांकि कुछ तहसीलों ने बेहतर प्रदर्शन किया है लेकिन कई क्षेत्रों में काम की रफ्तार बेहद धीमी बनी हुई है। इटावा सदर तहसील सबसे फिसड्डी साबित हुई है जहां लक्ष्य की तुलना में मात्र 65.61 प्रतिशत कार्य पूरा हो सका है। इसके विपरीत भरथना में 84.48 प्रतिशत, सैफई में 83.30 प्रतिशत और जसवंतनगर में 81.75 प्रतिशत किसानों ने फार्मर रजिस्ट्री करवाई है।

वहीं किसानों का कहना है कि कई मामलों में लेखपाल गांवों में पहुंचकर जांच करने के बजाय फाइलों को लंबित रख रहे हैं। इससे न केवल अभियान प्रभावित हो रहा है बल्कि भविष्य में किसान सम्मान निधि, फसल बीमा और अन्य योजनाओं के लाभ पर भी असर पड़ने की आशंका बढ़ रही है।

लेखपालों के पोर्टल पर लंबित मामले

तहसील मामले

भरथना 4,375

ताखा 1,567

चकरनगर 1,279

इटावा सदर 927

सैफई 789

जसवंतनगर 282

किसानों की बात

फोटो 12::उमाकांत त्रिपाठी। संवाद

गाटा न जुड़ने से खाद खरीदने में परेशानी

किसान उमाकांत त्रिपाठी ने बताया कि उन्होंने लगभग 10 माह पहले फार्मर रजिस्ट्री करा ली थी लेकिन पोर्टल पर अभी भी लंबित ही दिखा रहा है। उन्होंने बताया कि उनके कुछ गाटा छूट गए हैं इसके चलते उन्हें अपनी गेहूं बेचने के साथ ही खाद आदि की खरीदारी में भी परेशानी हो रही है।

फोटो 13::चंदन तिवारी। संवाद

सीएम पोर्टल पर कर चुके शिकायत

किसान चंदन तिवारी ने बताया कि एक वर्ष पूर्व फार्मर रजिस्ट्री कतावा ली थी लेकिन पेंडिंग चल रही है। उन्होंने बताया कि कई बार अधिकारियों से संपर्क किया तो सिर्फ आश्वासन मिला। पिछले सप्ताह उन्होंने मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत है। अगर यही स्थिति रही तो कृषि विभाग की कई योजनाओं से वंचित रह जाएंगे।

वर्जन

फार्मर रजिस्ट्री के मामले लंबित क्यों हैं इसकी जानकारी करेंगे। साथ ही पोर्टल से लेकर अन्य जो तकनीकी खामी आ रही है उसके समाधान के लिए लखनऊ मुख्यालय में भी बात करके समाधान करवाएंगे। फार्मर रजिस्ट्री किसानों के लिए जरूरी है, इसके लिए किसानों को जागरूक भी किया जा रहा है।-विपिन कुमार, एडीएम



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