प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में शामिल घटिया आजम खां स्थित विक्टोरिया इंटर कॉलेज शिक्षा से ज्यादा प्रबंधन विवाद के कारण सुर्खियों में है। प्रबंधन संघर्ष का असर सीधे विद्यार्थियों के भविष्य पर पड़ रहा है। जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) रविंद्र पाल तोमर के निरीक्षण और नामांकन बढ़ाने के निर्देश के बावजूद एक माह में विद्यालय में एक भी नए छात्र ने प्रवेश नहीं लिया है।
विद्यालय में वर्तमान में 17 शिक्षक कार्यरत हैं और करीब 80 विद्यार्थियों का नामांकन दर्ज है लेकिन प्रतिदिन महज 15 से 20 छात्र पढ़ाई के लिए आते हैं। विद्यालय की शैक्षणिक स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। विज्ञान प्रयोगशाला पर ताला लटका है और पढ़ाई-लिखाई की व्यवस्थाएं भी बेहद सीमित हैं। दूसरी ओर, प्रबंधन विवाद की न्यायालय में चार से पांच रिट लंबित हैं, जिनका असर विद्यार्थियों के भविष्य पर पड़ रहा है। अभी हाल ही में हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की अंकतालिकाओं के वितरण के दौरान भी विवाद सामने आया है।
दोनों पक्ष अपने-अपने प्रधानाचार्य होने का दावा करते रहे, जिससे अंकतालिकाओं पर हस्ताक्षर का संकट खड़ा हो गया। विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित न हो, इसके लिए शिक्षा विभाग ने राजकीय इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. मानवेंद्र सिंह को हस्ताक्षर करने के लिए अधिकृत किया। इसके बाद ही विद्यार्थियों को अंकतालिकाएं वितरित की जा सकीं। डीआईओएस रविंद्र पाल तोमर ने बताया कि चार जुलाई को विक्टोरिया इंटर कॉलेज का निरीक्षण किया था। उस समय छात्रों के नामांकन कम मिले थे। इस पर नामांकन संख्या बढ़ाने का निर्देश दिया गया था। नामांकन बढ़ाने के लिए दोबारा पत्र भेजा जाएगा। प्रबंधन व प्रधानाचार्य का आपसी विवाद न्यायालय में चल रहा है।
जेडी कार्यालय के बाहर भी हुई हाथापाई
प्रबंधन विवाद अदालतों तक ही सीमित नहीं रहा। कुछ दिन पहले संयुक्त शिक्षा निदेशक (जेडी) कार्यालय से बाहर निकलते ही दोनों पक्षों के समर्थकों के बीच हाथापाई हो गई। मामला पुलिस तक पहुंचा और जांच के लिए सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले गए। दोनों पक्षों के दावों के बीच शिक्षा विभाग का समय इसी प्रकरण में खर्च हो रहा है, जबकि विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था लगातार पटरी से उतरती जा रही है।
कभी 2000 छात्रों से गुलजार था विद्यालय
उत्तर प्रदेश के राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष देवी नरवार ने बताया कि करीब 15 वर्षों से प्रबंधन विवाद ने विक्टोरिया इंटर कॉलेज की पहचान को गहरा नुकसान पहुंचाया है। एक समय ऐसा था जब विद्यालय में करीब 2000 विद्यार्थियों का नामांकन हुआ करता था लेकिन अब यह संख्या सिमटकर लगभग 80 रह गई है। नए सत्र में भी एक माह बीतने के बाद एक भी नया प्रवेश नहीं होना विद्यालय की गिरती साख की तस्वीर पेश करता है।
