झांसी। बबीना ब्लॉक का पलिंदा गांव जैविक खेती और गोबर गैस प्लांट के जरिए एलपीजी गैस मुक्त गांव बनने की ओर बढ़ रहा है। यहां नवंबर तक 200 से अधिक गोबर गैस प्लांट लगाए जाएंगे। इस मुहिम में अमेरिकी एनआरआई भी मदद करेंगे। इस प्लांट से ग्रामीणों को न सिर्फ ईंधन बल्कि जैविक खाद भी मिलेगी। यह मॉडल प्रदेश के अन्य गांवों में भी लागू करने की योजना है।
पलिंदा गांव प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता का गृह गांव है। गांव में 200 से अधिक परिवार निवास करते हैं। योजना के तहत लगभग 1701 एकड़ कृषि भूमि पर रासायनिक खाद की जगह गोबर गैस प्लांट से तैयार जैविक खाद के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। लक्ष्य है कि आने वाले समय में गांव पूरी तरह रासायनिक खाद और एलपीजी पर निर्भरता कम कर आत्मनिर्भर बने। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजय कुमार सिंह ने बताया कि नवंबर तक 200 से अधिक गोबर गैस प्लांट स्थापित किए जाएंगे। एक प्लांट की लागत करीब 48 हजार रुपये है। प्रवासी भारतीय (एनआरआई) अर्पित पिपरसानियां भी आर्थिक सहयोग करेंगे। शुरुआती चरण में किसानों के लिए 1.35 लाख रुपये की सहायता उपलब्ध कराई है। वहीं, गो सेवा आयोग अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि यह प्रयोग सफल होने पर प्रदेश के अन्य गांवों में भी इसे लागू किया जाएगा। भविष्य में प्रदेश के गांवों में एक लाख से अधिक गोबर गैस प्लांट स्थापित करने की योजना है। इसमें पशुपालन विभाग का भी सहयोग लिया जाएगा।
घर-घर के जैविक कचरे से बनेगी खाद
योजना के तहत घरों से निकलने वाले फल-सब्जियों के अवशेष, टमाटर, मिर्च, धनिया, धान की पराली और अन्य जैविक कचरे का भी उपयोग किया जाएगा। इसके लिए विशेष मिक्सर तैयार किया जा रहा है, जिसमें कचरे को संसाधित कर जैविक खाद बनाई जाएगी। इस खाद का उपयोग गांव की खेती में किया जाएगा।
