देश के लिए जान कुर्बान करने वाले शहीद की विधवा को अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए अब सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। गांव डावली में शहीद उदय सिंह की पत्नी को आजीविका के लिए पट्टे पर मिली चार बीघा जमीन पर बनी सामुदायिक पानी की टंकी उनके लिए मुसीबत बन गई है। ओवरफ्लो होते पानी और टूटी तारबंदी के कारण फसल बर्बाद हो रही है, लेकिन प्रशासन मौन है।
वर्ष 2012 में जम्मू-कश्मीर बॉर्डर पर आतंकियों से लोहा लेते हुए उदय सिंह शहीद हो गए थे। प्रशासन ने उनकी पत्नी मिथलेश को गांव डावली में गाटा संख्या 325/1693 में चार बीघा कृषि भूमि का पट्टा दिया था। इस जमीन पर पहले से एक सामुदायिक पानी की टंकी बनी हुई है, जिसे खेत की नाप के दौरान अलग नहीं किया गया। पीड़िता का आरोप है कि टंकी के ओवरफ्लो होने से खेत में पानी भर जाता है और फसल नष्ट हो जाती है। आसपास के लोगों ने खेत की तारबंदी भी तोड़ दी है, जिससे छुट्टा मवेशी फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
मिथलेश ने मुख्यमंत्री, जिलाधिकारी और खंड विकास अधिकारी तक गुहार लगाई है। आरोप है कि प्रधान इसे हटाने को तैयार नहीं हैं। दूसरी ओर आईजीआरएस जांच रिपोर्ट के अनुसार, टंकी को हटाने के लिए ग्राम पंचायत की खुली बैठक में प्रस्ताव पारित कर जल निगम से समन्वय स्थापित करना होगा, तभी इसे स्थानांतरित किया जा सकता है। लालफीताशाही से परेशान होकर अब शहीद की पत्नी ने चेतावनी दी है कि यदि ग्राम सभा अपनी निधि से टंकी को शिफ्ट नहीं करती है, तो वह सबमर्सिबल समेत भूमि को जोतवा देंगी। इस संबंध में जिलाधिकारी मनीष बंसल का कहना है कि मामले की जांच कराई जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई होगी।
