बाह। लंपी वायरस के संक्रमण के चलते 2022 में बटेश्वर का पशु मेला नहीं लगा था। इससे पहले कोविड-19 के चलते 2020 में मेला स्थगित रहा था। लंपी की दस्तक से बाह के 214 गांवों में दहशत फैली हुई है। पशु पालन विभाग ने बाह-जैतपुर विकास खंड में 12500 लंपी रोधी टीके लगाए गए हैं। उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील कुमार ने बताया कि बाह विकास खंड में 6000 एवं जैतपुर विकास खंड में 6500 टीके लगाए गए हैं। अब तक लंपी संक्रमित 18 गोवंश चिह्नित हुए हैं।
बाह के कुंवरखेडा, भदरौली में 2-2, जरार, कनारी, बाले की गढ़ी, जेबरा, बिचोला, पुरा चक्रपान में 1-1, जैतपुर के कमतरी में 4, वनकटी, कूकापुर, रानी का बाग गांव में 1-1 गोवंश लंपी रोग की चपेट में आए हैं। जिनको आइसोलेशन में रख कर उपचार किया गया है। लंपी रोग के प्रकोप से गोपालकों को चिंता सता रही है। पशु चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि लंपी की चपेट में आने वाले गोवंश के शरीर पर गांठें और संक्रमण के लक्षण सामने आ जाते हैं। कमजोरी की हालत में जल्द ही इससे गोवंश की मौत हो जाती है। उन्होंने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में पशु पालन विभाग लंपी रोग निरोधी टीके लगवा रहा है। उन्होंने पशुपालकों का आह्वान किया है कि लंपी के लक्षण दिखने पर अस्पताल में तत्काल सूचना दें, जिससे समय रहते संक्रमित पशु का इलाज संभव हो सके।
क्या है लंपी संक्रमण
लंपी रोग मुख्य रूप से गोवंशों में होता है। यह त्वचा से संबंधित है। इस रोग की चपेट में आने के बाद पशु के शरीर पर गांठें पड़ जाती हैं, जो बाद में घाव बन जाते हैं। गोवंश का तापमान बढ़ जाता है। उनके मुंह और नाक से स्राव होता है। समय पर उपचार न मिलने के कारण और अत्यधिक कमजोरी से गोवंश मर जाता है।
ये हैं शुरुआती लक्षण
पशुओं में लंपी वायरस के शुरुआती लक्षणों में तेज बुखार आना, आंख और नाक से पानी बहना, मुंह से लार निकलना और पशु का सुस्त होकर चारा कम खाना शामिल है। इसके कुछ ही दिनों बाद शरीर, खासकर सिर और गर्दन पर गोल व सख्त गांठें उभरने लगती हैं।
