झांसी। परिवहन विभाग के कार्यों में वाहन मालिकों को नाम की स्पेलिंग में मामूली अंतर के कारण परेशानी हो रही है। गाड़ी ट्रांसफर कराने या प्रदूषण प्रमाण पत्र जारी कराने जैसे कार्यों में यह समस्या आ रही है। आधार कार्ड और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (आरसी) में नाम की स्पेलिंग में गड़बड़ी से ऑनलाइन प्रक्रिया अटक जाती है। यह स्थिति विभागीय अधिकारियों के लिए भी समाधान करना एक चुनौती बन गई है।
ऑनलाइन व्यवस्था लागू होने के बाद से वाहन ट्रांसफर और प्रदूषण प्रमाण पत्र जैसे कार्य ऑनलाइन हो गए हैं। लेकिन, यदि वाहन स्वामी के आधार कार्ड और आरसी में नाम की स्पेलिंग भिन्न होती है, तो ऑनलाइन आवेदन अस्वीकृत हो जाता है। ऐसी स्थिति में, वाहन मालिक नाम सही कराने के लिए परिवहन विभाग पहुंचते हैं। अधिकारियों द्वारा उन्हें डीलर के पास जाने या स्टाम्प पेपर पर लिखकर देने की सलाह दी जाती है। वाहन मालिकों को कचहरी के चक्कर लगाकर स्टाम्प पेपर तैयार करवाना पड़ता है। इसके बाद ही वे आवेदन जमा कर आरसी में नाम ठीक करा पाते हैं। सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी सुजीत सिंह ने बताया कि ऑनलाइन व्यवस्था छोटी सी गड़बड़ी भी स्वीकार नहीं करती है।
ऑनलाइन प्रक्रिया की चुनौतियां
ऑनलाइन प्रणाली ने कई कार्यों को सुचारू बनाया है, लेकिन नाम की स्पेलिंग में अंतर बड़ी बाधा बन गया है। आधार कार्ड और आरसी में नाम का मिलान न होने पर आवेदन तुरंत रद्द हो जाता है। इससे वाहन मालिकों को बार-बार विभाग के चक्कर लगाने पड़ते हैं। यह समस्या विशेष रूप से गाड़ी ट्रांसफर और प्रदूषण प्रमाण पत्र के लिए सामने आ रही है।
समाधान और आवश्यक सुधार
नाम की स्पेलिंग में सुधार के लिए वाहन मालिकों को स्टाम्प पेपर बनवाना पड़ता है। कचहरी से स्टाम्प पेपर तैयार कराने के बाद ही वे अपनी समस्या का समाधान कर पाते हैं। सुजीत सिंह के अनुसार, मोबाइल अपडेट के साथ नाम और अन्य विवरणों की स्पेलिंग में सुधार कराना आवश्यक है। यह सुनिश्चित करेगा कि भविष्य में ऑनलाइन कार्यों में कोई रुकावट न आए।
