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शिक्षक और उसके परिवार को सदस्यों की जिंदगी खत्म हो चुकी है। परिवार के सदस्य यादों के झरोखे में जाने पर सुबक पड़ते हैं। सुदामापुर गांव सोमवार को भी शांत रहा। कहीं कोई हलचल नहीं हुई। गांव के गलियारों में खामोशी छाई रही, लेकिन ग्रामीण और परिवार के सदस्यों की जुबां पर चंदन और पूनम के बीच की निकटता की सुगबुगाहट तेज है। खासकर महिलाएं धीरे-धीरे खुलकर बोलने लगी हैं। चर्चाओं से यह बात सामने आ रही है कि चंदन और पूनम की निकटता एक हादसे के बाद बढ़ी। पूनम टूट गई थी तो चंदन ने संबल दिया और फिर बात जीने-मरने तक आ गई।

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सोमवार को सुदामापुर गांव के गलियारे शांत रहे। न कोई आया न गया, पुलिस के पहरा और उनकी बातचीत बीच-बीच में सन्नाटे को तोड़ती नजर आई। घरों के भीतर ही लोग रहे, जिसे काम पर जाना था वह चला गया। साथ ही हत्याकांड की पृष्ठभूमि क्यों बनी और कैसे शिक्षक सुनील जब कुछ जानने के बाद भी घुटता रहा। इस पर चर्चा न केवल परिवार के बीच होती रही, बल्कि ग्रामीण भी अपने घरों में इस पर दबी जुबां से बात कर रहे हैं। गांव से एक किलोमीटर दूर रहने वाले अंबरा मुठई निवासी अरविंद (44) जो खुद को शिक्षक का मित्र बताते हैं। बताया कि कौन दोषी है, क्या चंदन और पूनम के बीच रहा, यह तो कहना मुश्किल है, लेकिन इतना जरूर है कि एक हादसे ने पूनम को चंदन की तरफ मोड़ दिया। बातों ही बातों में पता चला कि शिक्षक सुनील की शादी उतरपारा निवासी पूनम से 2016 में हुई थी। 

उस दौरान सुनील भट्ठे में मुनीम का काम करने के साथ फेरी लगाते थे। समय ने करवट ली और सुनील पहले पुलिस और फिर शिक्षक बने। इसी के साथ सुनील और पूनम की जिंदगी में बदलाव भी आया। 2018 में उनके जुड़वा बच्चे हुए। एक बेटी जिसकी नाम समीक्षा था और एक बेटा, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। पैदा होने के बाद ही वह बेटा बीमार पड़ा गया। उस दौरान पूनम शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती थी। चंदन वहीं पर लैब टेक्नीशियन का काम करता था। पूनम को देखकर चंदन के मन में साहनुभूति जागी और उसने पूनम और सुनील की मदद की। 



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