राम मंदिर के दानपात्र से धनराशि में कथित हेराफेरी के आरोपों को लेकर सियासत तेज है। इस मुद्दे पर श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के बयान और उसके बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव की सोशल मीडिया पोस्ट के बीच अब मंदिर की आय और चढ़ावे से जुड़े आधिकारिक आंकड़े चर्चा में आ गए हैं। ट्रस्ट का दावा है कि रामलला को मिलने वाले चढ़ावे और दान की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी व्यवस्था के तहत संचालित होती है तथा प्रत्येक रुपये का हिसाब रखा जाता है।

राम मंदिर ट्रस्ट की बीते मार्च माह में हुई बैठक में प्रस्तुत वित्तीय रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 में मंदिर को विभिन्न माध्यमों से 220.81 करोड़ रुपये की आय हुई। इनमें सबसे अधिक 54.79 करोड़ रुपये रामलला की हुंडी (दानपात्र) से प्राप्त हुए। इस आधार पर मंदिर को दानपात्रों के माध्यम से हर माह औसतन करीब पांच करोड़ रुपये का चढ़ावा मिल रहा है। वहीं ऑनलाइन दान के रूप में 8.33 करोड़ रुपये प्राप्त हुए।

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रिपोर्ट के मुताबिक ट्रस्ट के भारतीय स्टेट बैंक खाते में वर्तमान में लगभग 1940 करोड़ रुपये जमा हैं, जबकि राम मंदिर निर्माण और उससे जुड़े कार्यों पर अब तक करीब 1800 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। आय के मामले में राम मंदिर देश के प्रमुख मंदिरों में शीर्ष मंदिरों की श्रेणी में शामिल हो चुका है।

रोज होती है चढ़ावे की गिनती, 40 लोग रहते हैं मौजूद

ट्रस्ट के अनुसार दानपात्रों से निकलने वाली धनराशि की गिनती प्रतिदिन की जाती है। इस प्रक्रिया में करीब 15 बैंक कर्मचारी और 25 ट्रस्ट कर्मचारी शामिल रहते हैं। गिनती सीसीटीवी निगरानी में होती है और पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड तैयार किया जाता है। गिनी गई धनराशि को रजिस्टर में दर्ज करने के बाद मंदिर परिसर में बने सुरक्षित लॉकर में रखा जाता है तथा अगले दिन बैंक खाते में जमा करा दिया जाता है। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राम मंदिर और दर्शन मार्ग पर विभिन्न स्थानों पर करीब चार दर्जन दानपात्र स्थापित किए हैं। श्रद्धालु दर्शन के बाद इनमें स्वेच्छा से नकद दान अर्पित करते हैं। ट्रस्ट ने इस व्यवस्था के संचालन और धनराशि की गिनती के लिए भारतीय स्टेट बैंक को अधिकृत किया है।



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