
श्रीरामकथा के दौरान व्यास पीठ पर मौजूद जगद्गुरु रामभद्राचार्य व प्रस्तुति देतीं मालिनी अवस्थी
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तुलसी पीठाधीश्वर पद्मविभूषण जगद्गुरु रामभद्राचार्य के 75वें जन्मोत्सव का अमृत महोत्सव के रूप में रविवार को भव्य शुभारंभ हुआ। 14 से 22 जनवरी तक चलने वाले उत्सव में रामकथा के साथ देश के नामचीन कलाकार प्रस्तुति भी दे रहे हैं। इस दौरान देशभर के भक्तों का जन सैलाब उमड़ पड़ा।
रामकथा में जगद्गुरु ने कहा कि रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के साथ ही उनकी दो प्रतिज्ञाएं पूर्ण हो गईं। पहली प्रतिज्ञा थी कि जब तक रामलला भव्य मंदिर में विराजमान नहीं होंगे, वह अपनी किसी भी कथा में श्रीराम का राज्याभिषेक नहीं करेंगे। दूसरी प्रतिज्ञा थी कि अयोध्या धाम में कथा भी करने नहीं आएंगे। उन्होंने बताया कि ढांचा गिरने के बाद रामनवमी के दिन मेरे अयोध्या आने पर प्रतिबंध लग गया था, अब प्रतिवर्ष रामनवमी यहीं मनाएंगे।
इससे पहले भक्तमाल की बगिया में सुबह 1008 कुंडीय हनुमान महायज्ञ में वैदिक आचार्यों ने आहुति डाली। इसी के साथ अनुष्ठानों का दौर शुरू हुए। दोपहर में शास्त्रीय संगीत गायिका नलिनी ने कार्यक्रम प्रस्तुत किया। एक घंटे बाद मंच पर जगद्गुरु रामभद्राचार्य का आगमन हुआ। उनके साथ देश के शीर्ष साधु-संत भी पहुंचे। मंच पर रामकथा शुरू करने से पहले अभय चांडक, मधु चांडक, सत्यप्रकाश जोशी, रामगोपाल अग्रवाल, भंवर कुलारिया और नरसिंह ने पादुका पूजन किया।
इस विधि को मिथिलेशानंद, महंत संजय शरण, अवधेश दास व धर्मदास ने संपन्न कराया। इसके बाद तुलसी पीठ के उत्तराधिकारी आचार्य रामचंद्र दास ने पीठ का आधिकारिक एप लांच किया। कवि सुनील जोगी का लिखा और श्रेयांश प्रताप का गाया जगमग रघुवर की राजधानी गीत का विमोचन किया गया। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे, हनुमानगढ़ी के पुजारी राजू दास, पूर्व विधायक बाबा गोरखनाथ मौजूद रहे।
मालिनी के गीतों पर भक्तों के साथ झूमे संत
रामकथा के बाद लोक गायिका पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने गीत प्रस्तुत किए। उन्होंने जैसे ही पहला गीत ”राम जी के भइले जनमवा” गाया तो पंडाल में बैठे भक्त झूम उठे। साधु-संत भी झूमने लगे। ऐसे में जिस ओर नजर उठती माहौल भक्तिमय और उल्लास से भरा दिखाई देता।
