Ayodhya rape case accused Rahu Khan in from Sitapur, know the truth about him.

आरोपी राजू खान।
– फोटो : amar ujala

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अयोध्या दुष्कर्म कांड के तार सीतापुर से जुड़ते ही लहरपुर का मूड़ीखेड़ा गांव चर्चा में आ गया है। सीतापुर जिला मुख्यालय से करीब 22 किलोमीटर दूर लहरपुर सीतापुर मुख्य मार्ग से गनेशपुर गांव का मोड़ आता है। यहां से पक्के रास्ते पर करीब तीन किलोमीटर अंदर जाने पर मूड़ीखेड़ा गांव शुरू होता है। गांव के अंदर एक तंग गली से खड़जा मार्ग गया है। इस गली में तीसरा घर अयोध्या दुष्कर्म कांड के आरोपी राजू खान का है। यह वही राजू खान है जिस पर अयोध्या में एक नाबालिग संग दुष्कर्म का आरोप है। राजू मूल रूप से इसी गांव का निवासी है।

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मूड़ीखेड़ा गांव में सोमवार को सन्नाटा पसरा था। जब ग्रामीणों से अयोध्या दुष्कर्म कांड पर चर्चा की गई तो उन्होंने सिर झुका लिया। ग्रामीणों का मानना है कि राजू खान की इस हरकत ने पूरे गांव का सिर शर्म से झुका दिया है। कोई इस बारे में बात नहीं करना चाहता है। मूड़ीखेड़ा निवासी रियाज खान ने बताया कि अखबार पढ़कर ही इस कांड के बारे में पता चला था। इस कांड के कुछ दिन बाद राजू गांव आया था। कुछ देर रुकने के बाद चला गया था। ज्यादा कुछ पूछने पर कहा कि ऐसे घिनौने इंसान के बारे में बात नहीं करना चाहते हैं।

छिपकर रह रहा था राजू

वहीं, एक अन्य ग्रामीण ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अयोध्या कांड के कुछ दिन बाद राजू गांव आया था। यहां कुछ देर रुककर राजू गांव से सीधा लहरपुर कस्बा गया था। वहीं, कहीं छिपकर रह रहा था। बाद में पता चला कि पुलिस ने उसे पकड़ लिया है। सूत्रों की मानें तो राजू लहरपुर कस्बा क्षेत्र के ठठेरी टोला में छिपकर रह रहा था।

परिवार में हैं पांच भाई- चार बहनें

राजू खान के परिवार के सदस्य मूड़ीखेड़ा गांव में ही रह रहे हैं। सभी मजदूरी करके अपनी गुजर बसर कर रहे हैं। राजू खान के पांच भाई और चार बहने हैं। परिवार में केवल एक बीघा जमीन है, जिसकी देखभाल बड़ा भाई शादाब करता है। पिता अयाज खान 58 वर्षीय हैं। वह काफी देर तक दरवाजा खटखटाने के बाद भी बाहर नहीं आये। ग्रामीणों ने बताया कि इस कांड के बाद वह किसी से बातचीत भी नहीं कर रहे हैं। वहीं, घर की महिलाओं ने घर के अंदर से ही उनके कहीं बाहर जाने की बात बताई।

दयनीय है परिवार की आर्थिक स्थिति

मूड़ीखेड़ा निवासी अल्ताफ खान ने बताया कि राजू खान के परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद दयनीय है। घर में बाहर एक कच्चा बरामदा है, जिसमें एक हैंडपंप लगा है। इसी कच्चे बरामदे पर छप्पर पड़ा है। मकान पक्का बना है लेकिन प्लास्टर नहीं है। परिवार के लोग मजदूरी कर खर्चा चलाते हैं। करीब चार से पांच वर्ष पूर्व राजू कुछ अन्य साथियों के साथ अयोध्या चला गया था। वहीं, बेकरी में नौकरी कर रहा था।

कभी कभार ही आता था गांव

ग्रामीण मतीन खान ने बताया कि राजू कभी कभार ही गांव आता था। जब आता तो बस से ही आता था। कोई राजनीतिक पृष्ठभूमि नहीं है। कभी नहीं लगा कि राजू कुछ ऐसा कर सकता है।



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