विशेष न्यायाधीश पॉक्सो राहुल सिंह की अदालत ने दुष्कर्म की शिकार 15 वर्षीय किशोरी के सुरक्षित गर्भपात कराने की अनुमति दी है। अदालत ने मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) को मेडिकल बोर्ड गठित कर विधिक प्रावधानों के तहत गर्भपात की प्रक्रिया पूरी कराने का निर्देश दिया है। अदालत ने नाबालिग के स्वास्थ्य, आयु और हित को सर्वोपरि माना है।

पीड़िता के पिता ने अदालत में प्रार्थना पत्र देकर बताया कि दुष्कर्म के कारण उनकी बेटी गर्भवती हो गई है। उन्होंने कहा कि किशोरी करीब दो माह 10 दिन की गर्भवती है। कम उम्र और शारीरिक रूप से कमजोर होने के कारण गर्भ जारी रहने से उसके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। साथ ही सामाजिक और मानसिक परिस्थितियों को देखते हुए सुरक्षित गर्भपात की अनुमति देने का अनुरोध किया। आवेदन में पीड़िता को भी गर्भपात के पक्ष में बताया।

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अदालत ने थाना पचपेड़वा पुलिस और सीएमओ से रिपोर्ट तलब की। पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार 13 जुलाई को कराए गए दोबारा अल्ट्रासाउंड में गर्भावस्था नौ सप्ताह तीन दिन की पाई गई। वहीं सीएमओ ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि गर्भावस्था करीब दो माह 10 दिन की है और नियमानुसार सुरक्षित गर्भपात कराया जा सकता है। दोनों रिपोर्टों और चिकित्सकीय अभिलेखों के परीक्षण के बाद विशेष न्यायाधीश ने गर्भपात की अनुमति प्रदान करते हुए सीएमओ को मेडिकल बोर्ड गठित कर विधि के अनुसार पूरी प्रक्रिया कराने का आदेश दिया।

छह जून को गिरफ्तार हुआ था आरोपी

पचपेड़वा पुलिस ने किशोरी से दुष्कर्म के आरोप में धर्मपाल यादव को छह जून को गिरफ्तार किया था। पुलिस के अनुसार पीड़िता के चिकित्सकीय परीक्षण में आरोपों की पुष्टि हुई थी। आरोपी और पीड़िता पड़ोसी हैं। प्रभारी निरीक्षक ओपी सिह चौहान ने बताया कि आरोपी फिलहाल जिला कारागार में निरुद्ध है।



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