चिरगांव क्षेत्र में बारिश नहीं होने और पर्याप्त बिजली आपूर्ति न मिलने से धान की खेती गहरे संकट में पहुंच गई है। जिन किसानों ने धान की रोपाई कर दी है, उनकी फसल पानी के अभाव में सूखने लगी है, जबकि जिन किसानों की पौध तैयार है, वे खेतों में पानी न होने के कारण रोपाई भी नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में किसानों पर दोहरी मार पड़ रही है।
भरतपुरा निवासी किसान दीपचंद ने बताया कि गांव में एक हजार एकड़ से अधिक क्षेत्र में धान की रोपाई हुई है, लेकिन पिछले एक सप्ताह से बिजली की अनियमित आपूर्ति और बारिश नहीं होने के कारण खेतों में दरारें पड़ने लगी हैं। उन्होंने कहा कि फसल सूखने की कगार पर है और किसान बेहद चिंतित हैं। उनका कहना है कि एक ओर मानसून ने साथ छोड़ दिया है, तो दूसरी ओर बिजली विभाग की लापरवाही ने मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
इस संबंध में बिजली विभाग के टीजी-2 कालीचरन कुशवाहा ने बताया कि 15 दिन पहले क्षेत्र के जेई का स्थानांतरण हो गया था। वर्तमान में बड़ागांव के जेई के पास अतिरिक्त प्रभार है। उन्होंने कहा कि बिजलीघर पर क्षमता से अधिक लोड होने के कारण सभी 10 ग्रामीण फीडरों को एक साथ संचालित करना संभव नहीं है। इसलिए फीडरों को बारी-बारी से चलाया जा रहा है।
बिजली संकट से नाराज किसानों का आक्रोश भी बढ़ने लगा है। सोमवार को सिया गांव के दर्जनों किसान बिजलीघर पहुंचे और नियमित बिजली आपूर्ति की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। किसान शिशुपाल सिंह ने कहा कि बिजली नहीं मिलने से धान की खेती पूरी तरह प्रभावित हो रही है। यदि जल्द व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। धमना खुर्द के किसानों ने भी बिजली आपूर्ति पर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि सिंचाई नहीं होने से धान की फसल लगातार खराब हो रही है और यदि जल्द पर्याप्त बिजली नहीं मिली तो फसल बचाना मुश्किल हो जाएगा।
