बांदा शहर के रहने वाले 36 वर्षीय लक्ष्मीकांत उर्फ प्रमोद व्यापार करके अपने परिवार की आजीविका चलाते थे। मृतक के भाई भरत विश्वकर्मा ने पुलिस को बताया कि प्रमोद ने करीब दो वर्ष पहले अपने व्यवसाय को बढ़ाने के लिए ढाई लाख रुपये का ऋण लिया था।



परिजनों का दावा है कि इस लोन की पूरी राशि और उसका ब्याज बैंक को ईमानदारी से चुकाया जा चुका था और खाता भी सुचारू रूप से बंद होने की कगार पर था। इसके बावजूद, बैंक की तरफ से एक बड़ी लापरवाही या तकनीकी खामी के चलते प्रमोद को मानसिक प्रताड़ना का शिकार होना पड़ा।



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