मुसाफिर हैं हम भी… मुसाफिर हो तुम भी… इस शेर के जरिए पद्मश्री डॉ. बशीर बद्र ने जिंदगी के फलसफे को सरल शब्दों में सामने रख दिया। बृहस्पतिवार को उनके निधन की खबर सुनकर साहित्यकार अरुण डंग ने उनके इसी शेर को याद किया और कहा कि अपनी शायरी से वह लोगों की यादों में हमेशा जिंदा रहेंगे। आगरा में वह कई बार मुशायरों में शामिल होने आए थे। मुशायरों के मंच पर बशीर बद्र की नूरानी मुस्कान उनके जेहन में अब भी ताजा है।

अरुण डंग ने बताया कि वर्ष 1997 में मिर्जा गालिब की 200वीं जयंती पर ग्रांड होटल में कार्यक्रम किया गया था। उसमें डॉ. बशीर बद्र ने मिर्जा गाजिब की नज्मों पर खुलकर दिल से बात की थी। वह इस कार्यक्रम में अलग ही अंदाज में नजर आए थे। एक बार उन्होंने जो शायरी शुरू की तो रात तक उनके शेर लोगों के दिल में उतरते चले गए। कैंट क्षेत्र में उनके छोटे भाई रहते थे। वह इसी वजह से कभी होटल में नहीं रुके।

हास्य कवि रमेश मुस्कान के मुताबिक, ताज महोत्सव के साथ चित्रांशी संस्था की ओर से आयोजित मुशायरे में वह आगरा आ चुके हैं। मेरठ दंगों के बाद उनकी शायरी में दर्द नजर आने लगा था। उन्होंने डॉ. बद्र के साथ कई बार मंच साझा किया। वह युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत रहे। एक टीवी कार्यक्रम वाह-वाह में उन्होंने प्रोत्साहित किया। कवि पवन आगरी के मुताबिक वह टीवी कार्यक्रम वाह-वाह में उनके सामने अपनी प्रतिभा दिखाने गए थे। उस कार्यक्रम में डॉ. बद्र जज के रूप में शामिल हुए थे। आगरा में भी कई मुशायरों में वह आए।

ब्रज की खड़ी बोली से जन्मी है उर्दू

आगरा में वर्ष 2003 में प्रताप नगर में उनका अभिनंदन किया गया था। तत्कालीन मेयर किशोरी लाल माहौर, राजकुमार सामा, पूर्व विधायक केशो मेहरा, शहजाद अली की मौजूदगी में बशीर बद्र ने उर्दू का जन्म ब्रज की खड़ी बोली से बताया था। उन्होंने तब कहा था कि उर्दू ब्रजभाषा का आयाम है।

अटल के साथ न्यूयॉर्क में कल्चर कॉन्फ्रेंस में हुए शामिल

पद्मश्री से सम्मानित डॉ. बशीर बद्र ने आगरा में अपने अभिनंदन के दौरान बताया था कि वह तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के साथ अमेरिका के न्यूयॉर्क में इंडियन कल्चर कॉन्फ्रेंस में शामिल होने जा रहे हैं। उस कॉन्फ्रेंस में हर भाषा के केवल दो प्रतिनिधि ही बुलाए गए थे। डॉ. बद्र उनमें से एक थे।

वर्ष 2004 में भाजपा में शामिल होकर आए थे आगरा

अमर उजाला आकाईव के पुराने पन्नों में दर्ज है कि वर्ष 2004 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से प्रभावित होकर डॉ. बशीर बद्र भाजपा में शामिल हुए थे। मंजर भोपाली के साथ वह भाजपा में शामिल होकर आगरा आए थे। मैनपुरी की नुमाइश में जाने से पहले अमर उजाला ने 9 अप्रैल 2004 को उनका साक्षात्कार प्रकाशित किया था, जिसमें भाजपा में शामिल होने की सबसे बड़ी वजहों का खुलासा किया था।

 



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