आगरा। भारतीय हॉकी टीम की पारंपरिक नीली जर्सी के रंग में बदलाव पर देशभर में बहस छिड़ी हुई है। भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान और ओलंपियन जगबीर सिंह का कहना है कि नीला रंग भारतीय हॉकी की विरासत और पहचान का प्रतीक है। एस्ट्रोटर्फ के कारण विजिबिलिटी की समस्या हो सकती है लेकिन इसका समाधान नीले रंग को छोड़ना नहीं बल्कि जर्सी में ऑरेंज या अन्य कॉन्ट्रास्ट रंग की स्ट्रिप्स जोड़ना है।


उन्होंने बताया कि इससे खिलाड़ियों की दृश्यता भी बेहतर होगी और हमारी पहचान भी बनी रहेगी। जिला हॉकी संघ के सचिव संजय गौतम का कहना है कि भारतीय हॉकी की पहचान उसकी नीली जर्सी है। तकनीकी बदलाव जरूरी हो तो डिजाइन में किए जाएं। टीम की पारंपरिक पहचान नहीं बदलनी चाहिए। पूर्व खिलाड़ी शैलेश सिंह ने कहा कि हर बड़ी टीम की अपनी अलग पहचान होती है। भारत के लिए यह पहचान नीली जर्सी है इसलिए बदलाव संतुलित होना चाहिए।

राष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी मधु का कहना है कि नीली जर्सी हर खिलाड़ी के लिए गर्व का प्रतीक है। ऐसा बदलाव हो जिससे खिलाड़ियों को सुविधा भी मिले और भारतीय हॉकी की पहचान भी कायम रहे।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *